19. निम्नलिखित अपठित गद्यांश अथवा काव्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए। (3)
कई लोग समझते हैं कि अनुशासन और स्वतंत्रता में विरोध है, किन्तु वास्तव में यह भ्रम है। अनुशासन द्वारा स्वतंत्रता नहीं छीनी जाती, बल्कि दूसरों की स्वतंत्रता की रक्षा होती है। सड़क पर चलने के लिये हम स्वतंत्र हैं। हमें बाईं तरफ से चलना चाहिए, किंतु चाहें तो बीच में भी चल सकते हैं। इससे हम अपने प्राण तो संकट में डालते हैं, दूसरों की स्वतंत्रता भी छीनते हैं। विद्यार्थी भारत के भावी-राष्ट्र निर्माता हैं। उन्हें अनुशासन के गुणों का अभ्यास अभी से करना चाहिए जिससे वे भारत के सच्चे सपूत कहला सकें।
प्रश्न-
i. उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
ii. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
iii. राष्ट्र-निर्माता का वाक्य में प्रयोग कर लिखिए।
अथवा
कल जो हमारी सभ्यता पर थे हँसे अज्ञान से,
वे आज लज्जित हो रहे हैं अधिक अनुसंधान से।
जो आज प्रेमी हैं हमारे भक्त कल होंगे वही,
जो आज व्यर्थ विरक्त हैं अनुरक्त कल होंगे वही।
सब देश विद्या प्राप्ति को सतत यहां आते रहे,
सुरलोक में भी गीत ऐसे देव-गण गाते रहे-
"हैं धन्य भारतवर्षवासी धन्य भारत वर्ष है,
सुरलोक से भी सर्वथा उसका अधिक उत्कर्ष है" ।।
प्रश्न-
i. प्रस्तुत काव्यांश का शीर्षक लिखिए।
ii. प्रस्तुत काव्यांश का भाव स्पष्ट कर लिखिए।
iii. देव-गण कैसे गीत गाते रहे हैं?
20. निम्नलिखित काव्यांश का संदर्भ-प्रसंग, काव्य सौंदर्य सहित भावार्थ लिखिए- (4)
मैं और, और जग और कहाँ का नाता,
मैं बना-बना कितने जग रोज़ मिटाता;
जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव,
मैं प्रति पग से उस पृथ्वी को ठुकराता !
अथवा
धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ ।
काहू की बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ ।।
तुलसी सारनाम गुलामु है राम को, जाको रुचै सो कहै कछु ओऊ ।
माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोंको एकु न दैबको दोऊ ।।
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