वाच्य किसे कहते हैं ? कर्तृवाच्य किसे कहते हैं ? कर्मवाच्य किसे कहते हैं ? भाववाच्य किसे कहते हैं ? Vachya In Hindi Grammar

(द) भाषा-बोध : 1. वाच्य
( द ) भाषा-बोध
1. वाच्य
परिभाषा (म.प्र. 2022)— क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि क्रिया का प्रयोग कर्त्ता के अनुसार है या कर्म के अनुसार या भाव के अनुसार, उसे वाच्य कहते हैं।
'वाच्य' का शाब्दिक अर्थ है— 'बोलने का विषय'। क्रिया के जिस रूपांतर से यह जाना जाए कि क्रिया द्वारा किए गए विधान का केन्द्र-बिन्दु कर्ता है, कर्म है अथवा क्रिया-भाव, उसे वाच्य कहते हैं।
पहला उदाहरण— रमेश खेल रहा है।
इसमें खेलना क्रिया का कथ्य-बिंदु है तथा रमेश (कर्ता)। अतः यह कर्तृवाच्य वाक्य है।
दूसरा उदाहरण— रमेश द्वारा 'फुटबाल' खेली जा रही है। इसमें खेलने का कथ्य-बिंदु है 'फुटबाल' (कर्म)। अतः यह कर्मवाच्य है।
तीसरा उदाहरण— मुझसे खेला नहीं जा रहा।
इसमें स्वयं 'खेला जाना' (क्रिया-भाव) ही वाक्य का कथ्य-बिंदु है। अतः यह भाववाच्य वाक्य है।
उपर्युक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि वाच्य के तीन भेद होते हैं—
वाच्य के भेद (म.प्र. 2022)— वाच्य के दो भेद हैं—
I. कर्तृवाच्य— जिस वाक्य में वाच्य-बिंदु 'कर्ता' है, उसे 'कर्तृवाच्य' कहते हैं। जैसे—
(i) बच्चे खेल रहे हैं। (ii) सौरभ पुस्तक पढ़ता है। (iii) कन्याएँ ढोलक बजाएँगी।
इन तीन वाक्यों में कथ्य-बिंदु कर्ता (बच्चे, सौरभ, कन्याएँ) हैं। अतः ये कर्तृवाच्य वाक्य हैं।
II. अकर्तृवाच्य— जिन वाक्यों में कर्ता गौण अथवा लुप्त होता है, उन्हें अकर्तृवाच्य कहते हैं। इसके दो भेद हैं—
(1) कर्मवाच्य— जहाँ वाच्य-बिंदु कर्ता न होकर 'कर्म' हो, वहाँ कर्मवाच्य होता है। इन वाक्यों में या तो कर्ता का लोप हो जाता है, या उसके साथ 'से' या 'के द्वारा' का प्रयोग होता है। जैसे—
रमेश से अब दूध पिया नहीं जा रहा है। (कर्ता + से)
इस वाक्य में वाच्य-बिंदु 'दूध' (कर्म) है। अतः यह कर्मवाच्य वाक्य है।
अन्य उदाहरण— (1) राम के द्वारा रोटियाँ खाई जाती हैं। (2) किसान के द्वारा फसल काटी जाती है। (3) कविता से चित्र नहीं बनाया जाता।
(2) भाववाच्य— जिस वाक्य में वाच्य-केंद्र क्रिया हो अर्थात् जहाँ न कर्ता की प्रधानता हो, न कर्म की, बल्कि जहाँ 'क्रिया का भाव' ही मुख्य हो, उसे भाववाच्य कहते हैं। भाववाच्य की क्रिया सदा अन्यपुरुष पुल्लिंग एकवचन में रहती है। उदाहरणतया— मुझसे अब चला नहीं जाता। यहाँ चलने की असमर्थता ही प्रमुख है, कर्ता नहीं। अतः यह भाववाच्य वाक्य है।
अन्य उदाहरण—
(1) गर्मियों में खूब नहाया जाता है। (2) अब चला जाए। (3) थोड़ी देर सो लिया जाए। (4) राधा से रात-भर कैसे जागा जाएगा।

कर्मवाच्य के प्रयोग-स्थल— निम्नलिखित स्थलों पर कर्मवाच्य वाक्यों का प्रयोग होता है—
(1) जब कर्ता का निश्चित रूप से पता न हो या किसी कारणवश उसका उल्लेख न करना चाहते हों।
जैसे—
  • डाकपेटी में चिट्ठी डाल दी गई है।
  • उसकी घड़ी मेज पर से चुरा ली गई है।
  • चिट्ठी भेजी गई।
भाववाच्य के प्रयोग-स्थल—
(1) प्राय: असमर्थता या विवशता प्रकट करने के लिए 'नहीं' के साथ भाववाच्य का प्रयोग होता है। जैसे—
(1) अब खड़ा तक नहीं हुआ जाता। (2) अब तो हमसे चला भी नहीं जा रहा। (3) रातभर कैसे जागा जाएगा ?

(2) जहाँ 'नहीं' का प्रयोग नहीं होता, वहाँ मूल कर्ता जन-सामान्य होता है, जैसे—
(1) गर्मियों में छत पर सोया जाता है। (2) अब तो चला जाए। (3) आओ, जरा घूमा जाए।
वाच्य परिवर्तन
कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाने की विधि— (1) कर्तृवाच्य के कर्ता और कर्म की विभक्तियाँ हटाकर कर्ता के साथ 'से', 'के द्वारा' या 'द्वारा' लगाना चाहिए। (2) कर्तृवाच्य की मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल की क्रिया में बदलकर उसके साथ 'जाना' क्रिया का (मुख्य क्रिया के लिंग, वचन, पुरुष अनुसार) रूपांतरित रूप जोड़ देना चाहिए।
इन नियमों-विधियों के अनुसार किसी भी कर्तृवाच्य को कर्मवाच्य में सुगमता से बदला जा सकता है।
उदाहरणतया—
कर्तृवाच्य कर्मवाच्य
(1) लक्की पत्र लिखता है। लक्की से पत्र लिखा जाता है।
(2) माँ ने पुत्री को सुला दिया। माँ के द्वारा पुत्री सुला दी गई।
(3) रमेश पतंग उड़ा रहा है। रमेश द्वारा पतंग उड़ाई जा रही है।
(4) शशांक पुस्तक पढ़ता है। शशांक द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है।
(5) तुम लिख नहीं सकते। तुमसे लिखा नहीं जा सकता।
कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाने की विधि— (1) कर्ता के आगे 'से', 'द्वारा' अथवा 'के द्वारा' विभक्ति लगा दें। (2) मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल की क्रिया के एकवचन में बदलकर उसके साथ 'जाना' धातु के एकवचन, पुल्लिंग, अन्य पुरुष का वही काल लगा दें जो कर्तृवाच्य की क्रिया का है।
इन नियमों के अनुसार किसी भी कर्तृवाच्य को भाववाच्य में आसानी से बदला जा सकता है।
उदाहरणतया—
कर्तृवाच्य भाववाच्य
(1) बच्चे खेलेंगे बच्चों द्वारा खेला जाएगा।
(2) रोमी आँगन में सो रही थी रोमी के द्वारा आँगन में सोया जा रहा था।
(3) पक्षी आकाश में उड़ते हैं। पक्षियों से आकाश में उड़ा जाता है।
(4) मैं अब चल नहीं पाता। मुझसे अब चला नहीं जाता।
(5) सर्दियों में लोग खूब घूमते हैं। सर्दियों में (लोगों द्वारा) खूब घूमा जाता है।
कर्मवाच्य या भाववाच्य से कर्तृवाच्य बनाना— कर्मवाच्य या भाववाच्य से कर्तृवाच्य बनाना उपर्युक्त विधि के विपरीत है। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं—
कर्मवाच्य / भाववाच्य कर्तृवाच्य
(1) बच्चों से खेला जाएगा बच्चे खेलेंगे।
(2) सोनू से पढ़ा नहीं जाता सोनू नहीं पढ़ता।
(3) शैली द्वारा कल पत्र लिखा जाएगा शैली कल पत्र लिखेगी।
(4) विवेक से दौड़ा नहीं जाता विवेक दौड़ नहीं सकता।

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