- Get link
- X
- Other Apps
Chapter 2 Sanskrit class 9th solution NCERT Swarnkak full solution// class 9th Sanskrit chapter 2 Swarnkak full solution NCERT
- Get link
- X
- Other Apps
📱 MAINS EDUCATION APP
द्वितीयः पाठः — स्वर्णकाकः
कक्षा – नवमी (9वीं) | विषय – संस्कृतम् (शेमुषी भाग-1)
★ सम्पूर्ण अभ्यास-प्रश्नोत्तराणि एवं परीक्षापयोगी नोट्स ★
📖 पाठ-सार / परिचयः
प्रस्तुत पाठ पद्मशास्त्री द्वारा रचित विश्वप्रसिद्ध कथा-संग्रह 'विश्वकथाशतकम्' से संकलित है। यह म्यांमार (बर्मा) देश की एक लोककथा है। इसमें बताया गया है कि लोभ का परिणाम सदा बुरा तथा त्याग एवं संतोष का फल सुखद व उत्तम होता है।
प्रस्तुत पाठ पद्मशास्त्री द्वारा रचित विश्वप्रसिद्ध कथा-संग्रह 'विश्वकथाशतकम्' से संकलित है। यह म्यांमार (बर्मा) देश की एक लोककथा है। इसमें बताया गया है कि लोभ का परिणाम सदा बुरा तथा त्याग एवं संतोष का फल सुखद व उत्तम होता है।
प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखिए)—
(क) निर्धनायाः वृद्धायाः दुहिता कीदृशी आसीत्? (निर्धन वृद्धा की पुत्री कैसी थी?)
उत्तरम् — विनम्र मनोहरा च (विनम्र और सुंदर)
(ख) काकेन काः खादिताः? (कौए ने क्या खाए?)
उत्तरम् — तण्डुलान् (चावलों को)
(ग) प्रासादः कीदृशः वर्तते? (महल कैसा था?)
उत्तरम् — स्वर्णमयः (सोने से बना हुआ)
(घ) गृहमागत्य तया का समुद्घाटिता? (घर आकर उसने क्या खोला?)
उत्तरम् — मञ्जूषा (पेटी / संदूक)
(ङ) लोभाविष्टा बालिका कीदृशीं मञ्जूषां नयति / गृह्णाति? (लोभी लड़की ने कैसी पेटी ली?)
उत्तरम् — बृहत्तमाम् (सबसे बड़ी पेटी)
प्रश्न 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत (पूर्ण वाक्य में उत्तर)—
(क) निर्धनायाः वृद्धायाः दुहिता कीदृशी आसीत्?
उत्तरम् — निर्धनायाः वृद्धायाः दुहिता विनम्रा मनोहरा च आसीत्।
(ख) बालिकया पूर्वं कीदृशः काकः न दृष्टः आसीत्?
उत्तरम् — बालिकया पूर्वं नैकतादृशः स्वर्णपक्षः रजतमञ्जुः स्वर्णकाकः दृष्टः आसीत्।
(ग) निर्धनायाः दुहिता मञ्जूषायां कानि अपश्यत्?
उत्तरम् — निर्धनायाः दुहिता मञ्जूषायां महार्हाणि हीरकाणि विलोक्य प्रहर्षिता जाता।
(घ) बालिका किं दृष्ट्वा आश्चर्यचकिता जाता?
उत्तरम् — बालिका वृक्षस्योपरि स्वर्णमयं प्रासादं दृष्ट्वा आश्चर्यचकिता जाता।
(ङ) गर्विता बालिका कीदृशं सोपानम् अयाचत् कीदृशं च प्राप्नोत्?
उत्तरम् — गर्विता बालिका स्वर्णमयं सोपानम् अयाचत्, परं स्वर्णकाकः तस्यै ताम्रमयं सोपानमेव प्रायच्छत्।
प्रश्न 3. सन्धिं कुरुत (सन्धि कीजिए)—
| सन्धि-पदम् (विच्छेदः) | युक्त-पदम् (शुद्ध सन्धिः) |
|---|---|
| (क) नि + अवसत् | न्यवसत् (यण् सन्धि) |
| (ख) सूर्य + उदयः | सूर्योदयः (गुण सन्धि) |
| (ग) वृक्षस्य + उपरि | वृक्षस्योपरि (गुण सन्धि) |
| (घ) हि + अकारयत् | ह्यकारयत् (यण् सन्धि) |
| (ङ) च + एकाकिनी | चैकाकिनी (वृद्धि सन्धि) |
| (च) इति + उक्त्वा | इत्युक्त्वा (यण् सन्धि) |
| (छ) प्रति + अवदत् | प्रत्यवदत् (यण् सन्धि) |
| (ज) प्र + उक्तम् | प्रोक्तम् (गुण सन्धि) |
| (झ) अत्र + एव | अत्रैव (वृद्धि सन्धि) |
| (ञ) तत्र + उपस्थिता | तत्रोपस्थिता (गुण सन्धि) |
| (ट) यथा + इच्छम् | यथेच्छम् (गुण सन्धि) |
प्रश्न 4. स्थूलपदान्याधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (प्रश्न निर्माण कीजिए)—
(क) ग्रामे निर्धना स्त्री अवसत्।
प्रश्नम् — ग्रामे का अवसत्?
(ख) स्वर्णकाकं निवारयन्ती बालिका प्रार्थयत्।
प्रश्नम् — कं निवारयन्ती बालिका प्रार्थयत्?
(ग) सूर्योदयात् पूर्वमेव बालिका तत्रोपस्थिता।
प्रश्नम् — कस्मात् पूर्वमेव बालिका तत्रोपस्थिता?
(घ) बालिका निर्धनमातुः दुहिता आसीत्।
प्रश्नम् — बालिका कस्याः दुहिता आसीत्?
(ङ) लुब्धा वृद्धा स्वर्णकाकस्य रहस्यमभिज्ञातवती।
प्रश्नम् — लुब्धा वृद्धा कस्य रहस्यमभिज्ञातवती?
प्रश्न 5. प्रकृति-प्रत्यय-संयोगं कुरुत / पाठेभ्यः चित्वा लिखत (प्रकृति-प्रत्यय)—
| धातु + प्रत्ययः (प्रकृति-प्रत्यय) | निष्पन्नं पदम् (शुद्ध रूप) |
|---|---|
| (क) वि + लोक् + ल्यप् | विलोक्य |
| (ख) नि + क्षिप् + ल्यप् | निक्षिप्य |
| (ग) आ + गम् + ल्यप् | आगत्य |
| (घ) दृश् + क्त्वा | दृष्ट्वा |
| (ङ) शी + क्त्वा | शयित्वा |
| (च) लघु + तमप् | लघुतमम् |
| (छ) हस् + शतृ | हसन् / हसन्ती |
प्रश्न 6. अधोलिखितानां पदानां विलोमपदानि पाठात् चित्वा लिखत (विलोम शब्द)—
| मूल-पदम् (शब्द) | विलोम-पदम् (विपरीतार्थक शब्द) |
|---|---|
| (क) पश्चात् (बाद में) | पूर्वम् (पहले) |
| (ख) हसितुम् (हँसने के लिए) | रोदितुम् (रोने के लिए) |
| (ग) अधः (नीचे) | उपरि (ऊपर) |
| (घ) श्वेतः (सफेद) | कृष्णः (काला) |
| (ङ) सूर्यास्तः (सूर्यास्त) | सूर्योदयः (सूर्योदय) |
| (च) सुप्तः (सोया हुआ) | प्रबुद्धः (जागा हुआ) |
★ अतिरिक्त महत्त्वपूर्ण व्याकरण-बिन्दवः (समास एवं कारक) ★
1. समास-विग्रहः —
• स्वर्णकाकः = स्वर्णस्य काकः (षष्ठी तत्पुरुष समास)
• सूर्यकिरणेभ्यः = सूर्यस्य किरणेभ्यः (षष्ठी तत्पुरुष समास)
• काकचेष्टा = काकस्य चेष्टा (षष्ठी तत्पुरुष समास)
• लोभाविष्टा = लोभेन आविष्टा (तृतीया तत्पुरुष समास)
• सूर्यकिरणेभ्यः = सूर्यस्य किरणेभ्यः (षष्ठी तत्पुरुष समास)
• काकचेष्टा = काकस्य चेष्टा (षष्ठी तत्पुरुष समास)
• लोभाविष्टा = लोभेन आविष्टा (तृतीया तत्पुरुष समास)
2. विशेषण-विशेष्य युग्मानि —
• विनम्रा मनोहरा — दुहिता
• स्वर्णपक्षः — काकः
• महार्हाणि — हीरकाणि
• लुब्धा — वृद्धा
• स्वर्णपक्षः — काकः
• महार्हाणि — हीरकाणि
• लुब्धा — वृद्धा
Comments
Post a Comment