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Chapter 1 Sanskrit Class 9th full solution NCERT Bhartivasantgeeti // NCERT solution 9th Sanskrit chapter 1 bhartivasantgeeti
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प्रथमः पाठः — भारतीवसन्तगीतिः
कक्षा – नवमी (9वीं) | विषय – संस्कृतम् (शेमुषी भाग-1)
★ सम्पूर्ण अभ्यास-प्रश्नोत्तराणि एवं परीक्षापयोगी नोट्स ★
📖 पाठ-सार / परिचयः
प्रस्तुत गीत आधुनिक संस्कृत साहित्य के प्रख्यात कवि पण्डित जानकीवल्लभ शास्त्री की रचना-संग्रह 'काकली' से संकलित है। इसमें कवि सरस्वती देवी से नवीन वीणा बजाने की प्रार्थना करते हुए ऋतुराज वसन्त में प्रकृति के अनुपम सौन्दर्य और राष्ट्रप्रेम की मधुर भावना का संचार करते हैं।
प्रस्तुत गीत आधुनिक संस्कृत साहित्य के प्रख्यात कवि पण्डित जानकीवल्लभ शास्त्री की रचना-संग्रह 'काकली' से संकलित है। इसमें कवि सरस्वती देवी से नवीन वीणा बजाने की प्रार्थना करते हुए ऋतुराज वसन्त में प्रकृति के अनुपम सौन्दर्य और राष्ट्रप्रेम की मधुर भावना का संचार करते हैं।
प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखिए)—
(क) कविः कां वादयितुं प्रार्थयति? (कवि किसे बजाने की प्रार्थना करते हैं?)
उत्तरम् — वीणाम् (सरस्वतीम् / वाणीम्)
(ख) कीदृशीं वीणां निनादयितुं प्रार्थयति? (कैसी वीणा बजाने की प्रार्थना करते हैं?)
उत्तरम् — नवीनाम् (नवीन वीणा को)
(ग) गीतिं कथं गातुं कथयति? (गीत कैसे गाने को कहते हैं?)
उत्तरम् — मृदुम् / ललित-नीति-मञ्जुलाम् (मधुर और सुंदर नीतियों से युक्त)
(घ) सरसाः रसालाः कदा लसन्ति? (रसपूर्ण आम के वृक्ष कब सुशोभित होते हैं?)
उत्तरम् — वसन्ते (वसन्त ऋतु में)
(ङ) अलीनां ततिं कीदृशीं प्रेक्ष्य वीणां वादयितुं कथयति? (भौंरों की कैसी पंक्ति देखकर?)
उत्तरम् — मलिनाम् / नताम् (काले वर्ण की / झुकी हुई पंक्ति को देखकर)
प्रश्न 2. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत (पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखिए)—
(क) कविः वाणीं किं कथयति?
उत्तरम् — कविः वाणीं कथयति यत् अयि वाणि! नवीनां वीणां निनादय, ललित-नीति-मञ्जुलां गीतिं च मृदुं गाय।
(ख) वसन्ते किं भवति?
उत्तरम् — वसन्ते सरसाः रसालाः लसन्ति, मधुरकूजितानां कोकिलानां समूहाः च शोभन्ते।
(ग) सलिलं तव वीणामाकर्ण्य कथम् उच्छलेत्?
उत्तरम् — तव विमलां वीणामाकर्ण्य नदीनां कान्तसलिलं सलीलं (क्रीडया सहितम्) उच्छलेत्।
(घ) कविः भगवतीं भारतीं कस्याः तीरे मधुमाधवीनां नतां पङ्क्तिम् अवलोक्य वीणां वादयितुं कथयति?
उत्तरम् — कविः भगवतीं भारतीं कालिन्दात्मजायाः (यमुनायाः) सवानीरतीरे मधुमाधवीनां नतां पङ्क्तिम् अवलोक्य वीणां वादयितुं कथयति।
प्रश्न 3. 'क' स्तम्भे पदानि 'ख' स्तम्भे तेषां पर्यायपदानि दत्तानि, तानि चित्वा लिखत (पर्यायवाची मिलान)—
| 'क' स्तम्भः (पदानि) | 'ख' स्तम्भः (पर्यायपदानि / शुद्ध उत्तरम्) |
|---|---|
| (क) सरस्वती | वाणी |
| (ख) आम्रम् | रसालः |
| (ग) पवनः | समीरः |
| (घ) तटे | तीरे |
| (ङ) भ्रमराणाम् | अलीनाम् |
प्रश्न 4. अधोलिखितानि पदानि प्रयुज्य संस्कृतेन वाक्यरचनां कुरुत (वाक्य रचना)—
(क) निनादय (बजाओ) :
वाक्यम् — हे सरस्वति! स्वकीयां नवीनां वीणां निनादय।
(ख) मन्दमन्दम् (धीरे-धीरे) :
वाक्यम् — प्रातःकाले पवनः मन्दमन्दं वहति।
(ग) मारुतः (हवा/वायु) :
वाक्यम् — उपवने मलयमारुतः सर्वान् सुखयति।
(घ) सलिलम् (जल) :
वाक्यम् — नद्याः निर्मलं सलिलं प्रवहति।
(ङ) सुमनः (फूल) :
वाक्यम् — लतासु सुन्दरं सुमनः विकसति।
प्रश्न 5. प्रथम-पद्यांशस्य हिन्दीभाषया भावार्थं लिखत (गीत का सरल भावार्थ)—
पद्यांशः — "निनादय नवीनामये वाणि वीणां मृदुं गाय गीतिं ललितनीतिमञ्जुलाम्। मधुरमञ्जरीपिञ्जरीभूतमालाः वसन्ते लसन्तीह सरसा रसालाः कलापाः ललितकोकिलाकाकलीनाम्॥"
भावार्थ — हे माँ सरस्वती! नवीन वीणा को बजाइए और सुंदर नीतियों से परिपूर्ण मधुर गीत का गान कीजिए। इस वसन्त ऋतु में पीले वर्ण की आम की मंजरियों से युक्त रसीले आम के वृक्षों की कतारें सुशोभित हो रही हैं तथा मधुर कूकने वाली कोयल के समूह मनमोहक लग रहे हैं। हे माँ भारती! ऐसी मधुर वीणा बजाइए।
प्रश्न 6. अधोलिखितपदानां विलोमपदानि लिखत (विलोम शब्द लिखिए)—
| पदम् (मूल शब्द) | विलोमपदम् (विपरीतार्थक शब्द) |
|---|---|
| (क) कठोरम् | कोमलम् / मृदु |
| (ख) कटु | मधुरम् |
| (ग) शीघ्रम् | मन्दम् / चिरम् |
| (घ) प्राचीनम् | नवीनम् / अर्वाचीनम् |
| (ङ) नीरसः | सरसः |
★ अतिरिक्त महत्त्वपूर्ण व्याकरण-बिन्दवः (सन्धि एवं समास) ★
1. प्रमुख सन्धि-विच्छेदः —
• निनादये + अयि = निनादयै (अयादि सन्धि)
• लसन्ति + इह = लसन्तीह (दीर्घ सन्धि)
• वीणाम् + आकर्ण्य = वीणामाकर्ण्य
• कालिन्दात्मजायाः = कालिन्द + आत्मजायाः (दीर्घ सन्धि)
• लसन्ति + इह = लसन्तीह (दीर्घ सन्धि)
• वीणाम् + आकर्ण्य = वीणामाकर्ण्य
• कालिन्दात्मजायाः = कालिन्द + आत्मजायाः (दीर्घ सन्धि)
2. समास-विग्रहः —
• ललितपल्लवे = ललिताः पल्लवाः तेषु (कर्मधारय समास)
• मलयमारुतोच्चुम्बिते = मलयमारुतेन उच्छुम्बितानि तेषु (तत्पुरुष समास)
• सवानीरतीरे = वानीरेण सह वर्तते यत् तत् सवानीरम्, तस्य तीरे (अव्ययीभाव / तत्पुरुष)
• मलयमारुतोच्चुम्बिते = मलयमारुतेन उच्छुम्बितानि तेषु (तत्पुरुष समास)
• सवानीरतीरे = वानीरेण सह वर्तते यत् तत् सवानीरम्, तस्य तीरे (अव्ययीभाव / तत्पुरुष)
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