काव्य बोध - MAINS EDUCATION APP
विषय : काव्य बोध (Kavya Bodh)
काव्य की परिभाषाएँ, काव्य-भेद (प्रबंध एवं मुक्तक), महाकाव्य व खंडकाव्य की विशेषताएँ, प्रमुख रचनाकार एवं अंतर।
1. काव्य की परिभाषा (Definitions of Poetry)
भारतीय काव्यशास्त्र एवं विद्वानों के अनुसार काव्य की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं:
① आचार्य विश्वनाथ के अनुसार (साहित्यदर्पण) :
"वाक्यं रसात्मकं काव्यम्"
अर्थ : रसयुक्त (आनंद प्रदान करने वाला) वाक्य ही काव्य कहलाता है। अर्थात् जिस रचना से पाठक या श्रोता के हृदय में अलौकिक आनंद (रस) की अनुभूति हो, वही सच्चा काव्य है।
② पण्डितराज जगन्नाथ के अनुसार (रसगंगाधर) :
"रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्"
अर्थ : रमणीय (मनोहर / सुंदर एवं चमत्कृत) अर्थ का प्रतिपादन करने वाला शब्द-समूह ही काव्य कहलाता है।
③ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार (चिंतामणि) :
"जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञानदशा कहलाती है, उसी प्रकार हृदय की मुक्तावस्था रसदशा कहलाती है। हृदय की इसी मुक्ति की साधना के लिए मनुष्य की वाणी जो शब्द-विधान करती आई है, उसे कविता (काव्य) कहते हैं।"
2. काव्य के भेद (Classification of Poetry)
स्वरूप एवं रचना-शैली के आधार पर काव्य के मुख्यतः दो भेद होते हैं : प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य।
काव्य का वर्गीकरण
१. प्रबंध काव्य
- (क) महाकाव्य (विस्तृत जीवन चित्रण)
- (ख) खंडकाव्य (जीवन की एक घटना का चित्रण)
- (ग) आख्यानक गीतियाँ (पद्यबद्ध लघु कथा)
२. मुक्तक काव्य
- (क) पाठ्य मुक्तक (विचार/नीतिपरक)
- (ख) गेय मुक्तक / प्रगीत (भाव/संगीतपरक)
(A) प्रबंध काव्य (Prabandh Kavya)
परिभाषा : वह काव्य-रचना जिसमें किसी कथा या आख्यान का वर्णन आदि से अंत तक धारावाहिक, सुसंबद्ध और श्रृंखलाबद्ध रूप में होता है, उसे प्रबंध काव्य कहते हैं। इसमें प्रत्येक छंद/पद पूर्ववर्ती और परवर्ती छंदों से अर्थगत व कथागत रूप से जुड़ा रहता है।
उदाहरण : गोस्वामी तुलसीदास कृत 'रामचरितमानस', जयशंकर प्रसाद कृत 'कामायनी'।
प्रबंध काव्य के समस्त भेद :
- महाकाव्य : जिसमें किसी महापुरुष/नायक के संपूर्ण जीवन का समग्र व विशद चित्रण हो (उदा. रामचरितमानस)।
- खंडकाव्य : जिसमें नायक के संपूर्ण जीवन का वर्णन न होकर किसी एक प्रमुख घटना या अंश का चित्रण हो (उदा. पंचवटी, रश्मिरथी)।
- आख्यानक गीतियाँ : प्रबंध काव्य का वह रूप जिसमें पद्यबद्ध छोटी कथा गाकर कही जाती है (उदा. 'झांसी की रानी' - सुभद्रा कुमारी चौहान, 'रंग में भंग' - मैथिलीशरण गुप्त)।
(B) मुक्तक काव्य (Muktak Kavya)
परिभाषा : वह काव्य-रचना जिसमें प्रत्येक छंद अपने आप में पूर्णतः स्वतंत्र, स्वयंपूर्ण और स्वतंत्र अर्थ प्रकट करने वाला होता है, उसे मुक्तक काव्य कहते हैं। इसमें छंदों का पूर्व या पर पदों से कोई अनिवार्य कथागत संबंध नहीं होता।
उदाहरण : बिहारी लाल कृत 'बिहारी सतसई', कबीर, सूरदास एवं मीराबाई के पद, रहीम के दोहे।
मुक्तक काव्य के समस्त भेद :
- पाठ्य मुक्तक : इसमें विषय प्रधान, विचारपरक या नीतिपरक बातें कही जाती हैं। इसे केवल पढ़ा जाता है (उदा. कबीरदास, रहीम व बिहारी के दोहे)।
- गेय मुक्तक (प्रगीत) : इसमें भाव, अनुभूति, राग-ताल तथा संगीतात्मकता की प्रधानता होती है। इसे मधुर स्वर में गाया जा सकता है (उदा. सूरदास, मीराबाई, रसखान व तुलसीदास की 'विनय पत्रिका' के पद)।
3. महाकाव्य (Mahakavya) - परिभाषा, विशेषताएँ एवं रचनाकार
परिभाषा : महाकाव्य प्रबंध काव्य का वह उत्कृष्ट व विस्तृत रूप है जिसमें किसी महान नायक के जन्म से लेकर संपूर्ण जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का विशद, उदात्त और धारावाहिक चित्रण किया जाता है।
प्रमुख उदाहरण : रामचरितमानस (तुलसीदास), पद्मावत (जायसी), साकेत (मैथिलीशरण गुप्त), कामायनी (जयशंकर प्रसाद)।
महाकाव्य की प्रमुख 3 विशेषताएँ :
- 1. जीवन का समग्र व विस्तृत चित्रण : महाकाव्य में नायक के संपूर्ण जीवन का व्यापक चित्रण होता है, जिसमें जीवन के विविध पक्षों और मानवीय मूल्यों का समावेश रहता है।
- 2. सर्गबद्धता एवं विशाल कलेवर : महाकाव्य कम से कम 8 या उससे अधिक सर्गों (अध्यायों) में निबद्ध होता है तथा इसका आकार विस्तृत होता है।
- 3. धीरोदात्त नायक एवं मुख्य रस : इसका नायक कोई महान, कुलीन, धीरोदात्त पुरुष या देवता होता है। इसमें शांत, वीर अथवा श्रृंगार में से कोई एक 'अंगी' (मुख्य) रस होता है तथा अन्य रस गौण (सहायक) होते हैं।
प्रमुख महाकाव्य एवं उनके रचनाकार :
| क्र. |
महाकाव्य का नाम |
रचनाकार (कवि) |
| 1 |
रामचरितमानस |
गोस्वामी तुलसीदास |
| 2 |
पद्मावत |
मलिक मोहम्मद जायसी |
| 3 |
कामायनी |
जयशंकर प्रसाद |
| 4 |
साकेत |
मैथिलीशरण गुप्त |
| 5 |
प्रियप्रवास (खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य) |
अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' |
| 6 |
उर्वशी |
रामधारी सिंह 'दिनकर' |
| 7 |
लोकायतन |
सुमित्रानंदन पंत |
4. खंडकाव्य (Khandakavya) - परिभाषा, विशेषताएँ एवं रचनाकार
परिभाषा : खंडकाव्य प्रबंध काव्य का वह रूप है जिसमें नायक के संपूर्ण जीवन का वर्णन न होकर, उसके जीवन की किसी एक महत्वपूर्ण घटना, प्रसंग या खंड विशेष का मार्मिक, प्रेरणादायी और कलात्मक चित्रण किया जाता है।
प्रमुख उदाहरण : पंचवटी (मैथिलीशरण गुप्त), रश्मिरथी (रामधारी सिंह 'दिनकर'), सुदामा चरित (नरोत्तमदास)।
खंडकाव्य की प्रमुख 3 विशेषताएँ :
- 1. जीवन के एक अंश/घटना का चित्रण : इसमें नायक के पूरे जीवन का वर्णन न होकर जीवन के किसी एक विशेष प्रसंग या मार्मिक घटना का ही पूर्णता के साथ चित्रण होता है।
- 2. सीमित कलेवर एवं संक्षिप्तता : इसका आकार महाकाव्य की तुलना में संक्षिप्त और सीमित होता है। इसमें सर्गों की संख्या कम होती है या यह बिना सर्ग विभाजन के भी होता है।
- 3. एक मुख्य रस एवं अवांतर कथाओं का अभाव : इसमें मुख्यतः एक ही रस की प्रधानता होती है तथा इसमें अनावश्यक विस्तार या सहायक (उपकथाओं) का समावेश नहीं होता।
प्रमुख खंडकाव्य एवं उनके रचनाकार :
| क्र. |
खंडकाव्य का नाम |
रचनाकार (कवि) |
| 1 |
पंचवटी |
मैथिलीशरण गुप्त |
| 2 |
जयद्रथ वध |
मैथिलीशरण गुप्त |
| 3 |
सुदामा चरित |
नरोत्तमदास |
| 4 |
रश्मिरथी (कर्ण के जीवन पर आधारित) |
रामधारी सिंह 'दिनकर' |
| 5 |
हल्दीघाटी |
श्याम नारायण पाण्डेय |
| 6 |
गंगावतरण |
जगन्नाथदास 'रत्नाकर' |
5. महाकाव्य एवं खंडकाव्य में प्रमुख अंतर (Differences)
| अंतर का आधार |
महाकाव्य (Mahakavya) |
खंडकाव्य (Khandakavya) |
| 1. जीवन का चित्रण |
इसमें नायक के संपूर्ण एवं समग्र जीवन का विस्तृत चित्रण होता है। |
इसमें नायक के जीवन की किसी एक घटना या एक खंड का ही चित्रण होता है। |
| 2. कलेवर एवं सर्ग |
इसका आकार बहुत विशाल होता है और इसमें कम से कम 8 या अधिक सर्ग होते हैं। |
इसका आकार सीमित व संक्षिप्त होता है और इसमें कम सर्ग (या एक सर्ग) होते हैं। |
| 3. पात्र एवं कथाएं |
इसमें मुख्य कथा के साथ-साथ अनेक सहायक (प्रासंगिक/अवांतर) कथाएं एवं अनेक पात्र होते हैं। |
इसमें केवल एक मुख्य कथा होती है, कोई सहायक या गौण कथा नहीं होती तथा पात्र सीमित होते हैं। |
| 4. रस एवं विस्तार |
इसमें शांत, वीर या श्रृंगार में से एक मुख्य रस तथा जीवन के सभी रसों का समावेश होता है। |
इसमें प्रायः एक ही रस की प्रधानता होती है। |
| 5. प्रमुख उदाहरण |
रामचरितमानस, कामायनी, साकेत। |
पंचवटी, रश्मिरथी, सुदामा चरित। |
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