त्रैमासिक परीक्षा पेपर 2026 एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं विषय हिन्दी || Quarterly Exam 2026-27 Class 12th Hindi MP Board
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त्रैमासिक परीक्षा पेपर 2026 एमपी बोर्ड
कक्षा–10वीं | विषय–हिन्दी
प्र. 1. गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?
उत्तर: गोपियाँ उद्धव को भाग्यवान कहकर वास्तव में उन पर तीखा व्यंग्य करती हैं। वे कहना चाहती हैं कि उद्धव साक्षात प्रेम के अवतार श्रीकृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम-बंधन और विरह-वेदना से पूरी तरह मुक्त रहे। उद्धव का हृदय प्रेम की अनुभूति से सर्वथा अछूता रहा, जो वास्तव में उनका दुर्भाग्य है।
शब्द सीमा: ~45 शब्द
प्र. 2. उद्धव के व्यवहार की तुलना गोपियों ने किस-किस से की है?
उत्तर: गोपियों ने उद्धव के व्यवहार की तुलना कमल के उस पत्ते से की है, जो जल के भीतर रहकर भी गीला नहीं होता। इसके अलावा उन्होंने उद्धव की तुलना तेल से सनी मटकी से की है, जिस पर पानी की एक बूँद भी नहीं ठहरती। वे कृष्ण-सान्निध्य में रहकर भी प्रेम से निर्लिप्त रहे।
शब्द सीमा: ~48 शब्द
प्र. 3. गोपियों के अनुसार एक राजा का सच्चा धर्म क्या होना चाहिए?
उत्तर: गोपियों के अनुसार राजा का सच्चा धर्म यह होना चाहिए कि वह अपनी प्रजा को किसी भी प्रकार का कष्ट या दुःख न पहुँचने दे। राजा को सदैव प्रजा के सुख, कल्याण और अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए तथा नीति का पालन करते हुए किसी पर अन्याय नहीं होने देना चाहिए।
शब्द सीमा: ~46 शब्द
प्र. 4. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष टूटने के क्या तर्क दिए?
उत्तर: लक्ष्मण ने तर्क दिया कि बचपन में उन्होंने खेल-खेल में कई साधारण धनुहियाँ तोड़ी थीं, तब मुनि ने कभी क्रोध नहीं किया। इस पुराने और जीर्ण-शीर्ण धनुष के टूटने से किसी को क्या लाभ या हानि हो सकती थी? यह तो श्री राम के केवल छूते ही टूट गया, इसमें उनका कोई दोष नहीं है।
शब्द सीमा: ~49 शब्द
प्र. 5. लक्ष्मण ने एक सच्चे वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताई हैं?
उत्तर: लक्ष्मण के अनुसार सच्चा वीर योद्धा युद्धभूमि में अपनी वीरता का प्रदर्शन करता है, अपने मुँह से अपनी प्रशंसा नहीं करता। वीर पुरुष धैर्यवान, गंभीर और क्षमाशील होते हैं। वे युद्ध के मैदान में शत्रु को सामने देखकर केवल अपनी डींगें हांकने के बजाय पराक्रम से विजय प्राप्त करते हैं।
शब्द सीमा: ~46 शब्द
प्र. 6. परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए श्री राम ने क्या कहा?
उत्तर: शिव धनुष टूटने पर जब परशुराम अत्यधिक क्रोधित हुए, तब श्री राम ने अत्यंत विनम्र और शीतल वाणी में कहा कि हे मुनिवर! शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई दास या सेवक होगा। उन्होंने परशुराम से आज्ञा देने का अनुरोध करते हुए उनके क्रोध को शांत करने का प्रयास किया।
शब्द सीमा: ~47 शब्द
प्र. 7. कवि जयशंकर प्रसाद अपनी आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहते हैं?
उत्तर: कवि का मानना है कि उनका जीवन सामान्य, अभावग्रस्त और दुखों से भरा रहा है। उनके जीवन में ऐसी कोई महान उपलब्धि नहीं है जिसे सुनकर लोग प्रेरणा ले सकें। वे अपनी निजी वेदना, भूलों और कपटी मित्रों द्वारा दिए गए धोखे को सार्वजनिक कर स्वयं को उपहास का पात्र नहीं बनाना चाहते।
शब्द सीमा: ~48 शब्द
प्र. 8. 'स्मृति को पाथेय बनाने' से कवि जयशंकर प्रसाद का क्या आशय है?
उत्तर: 'पाथेय' का अर्थ यात्रा का संबल या मार्ग का सहारा होता है। कवि के एकाकी जीवन में प्रियतम के साथ बिताए गए सुखद पलों की मीठी यादें ही शेष बची हैं। जीवन की इस लंबी और थकाऊ यात्रा में यही मधुर स्मृतियाँ कवि के जीने का एकमात्र सहारा हैं, जिनके बल पर वे जी रहे हैं।
शब्द सीमा: ~49 शब्द
प्र. 9. कवि निराला बादलों से बरसने के स्थान पर 'गरजने' के लिए क्यों कहते हैं?
उत्तर: कवि निराला बादलों को क्रांति, पौरुष और नवजागरण का प्रतीक मानते हैं। वे समाज में परिवर्तन लाने और निष्क्रियता मिटाने के लिए जनमानस में नया जोश भरना चाहते हैं। शांत फुहार से क्रांति नहीं आ सकती, इसलिए कवि सोए हुए जनमानस में चेतना जगाने हेतु बादलों को गरजने के लिए कहते हैं।
शब्द सीमा: ~48 शब्द
प्र. 10. 'उत्साह' कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?
उत्तर: 'उत्साह' कविता में बादल तीन प्रमुख अर्थों की ओर संकेत करता है— पहला, पीड़ित और प्यासे जन की प्यास बुझाकर उन्हें तृप्ति प्रदान करने वाला रूप; दूसरा, समाज में नई चेतना और नवरचना करने वाले क्रांतिकारी कवि के रूप में; तथा तीसरा, जनमानस में संघर्ष की नई प्रेरणा भरने वाले शक्ति-पुंज के रूप में।
शब्द सीमा: ~48 शब्द
प्र. 11. फागुन मास में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से सर्वथा भिन्न है?
उत्तर: फागुन में प्रकृति का सौंदर्य चरम पर होता है। चारों ओर पेड़-पौधे लाल-हरे नए पत्तों और सुगंधित रंग-बिरंगे फूलों से लद जाते हैं। हवा मंद, मादक और सुगंधित हो जाती है। संपूर्ण वातावरण में नवजीवन और उल्लास छा जाता है। प्रकृति का ऐसा सजीव और मनमोहक रूप अन्य ऋतुओं में दिखाई नहीं देता।
शब्द सीमा: ~47 शब्द
प्र. 12. बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर होता है?
उत्तर: बच्चे की मुसकान निश्छल, स्वाभाविक, निष्पाप और स्वार्थहीन होती है। उसमें किसी प्रकार की बनावट या छल-कपट नहीं होता तथा वह कठोर से कठोर हृदय को भी पिघला देती है। इसके विपरीत बड़ों की मुसकान प्रायः औपचारिक, परिस्थितियों पर निर्भर, दिखावटी और कभी-कभी स्वार्थ व व्यंग्य से भरी होती है।
शब्द सीमा: ~46 शब्द
प्र. 13. फसल को 'हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा' क्यों कहा गया है?
उत्तर: फसलें केवल मिट्टी, धूप और पानी के संयोग से स्वतः तैयार नहीं होतीं। जब तक किसान और मजदूर अपने कठोर श्रम और हाथों के कोमल स्पर्श से उन्हें सींचते नहीं, तब तक वे फल-फूल नहीं सकतीं। फसलों की यह समृद्धि वास्तव में मेहनतकश किसानों के अनथक श्रम और समर्पण का ही परिणाम है।
शब्द सीमा: ~48 शब्द
प्र. 14. कवि नागार्जुन के अनुसार 'फसल' वास्तव में क्या है?
उत्तर: कवि के अनुसार फसल प्रकृति और मनुष्य के साझे श्रम का सुंदर परिणाम है। यह नदियों के अमृततुल्य जल का जादू, विभिन्न मिट्टियों के पोषक तत्वों का गुण-धर्म, सूर्य की किरणों का रूपांतरण, हवा की थिरकन और लाखों-करोड़ों किसानों के पसीने तथा श्रम का संयुक्त, साकार स्वरूप है।
शब्द सीमा: ~45 शब्द
प्र. 15. मुख्य गायक के साथ संगतकार की क्या भूमिका होती है?
उत्तर: संगतकार मुख्य गायक के भारी और गंभीर स्वर के साथ अपनी गूंज मिलाकर उसे संबल और मजबूती प्रदान करता है। जब मुख्य गायक अंतरे की जटिल तानों में भटक जाता है या उसका गला बैठने लगता है, तब संगतकार स्थायी को संभाले रखकर गायन को बिखरने से बचाता है।
शब्द सीमा: ~46 शब्द
प्र. 16. संगतकार की मनुष्यता किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर: संगतकार में अद्भुत प्रतिभा होने के बावजूद वह कभी अपनी आवाज़ को मुख्य गायक के स्वर से ऊँचा नहीं उठाता। वह सदैव पृष्ठभूमि में रहकर मुख्य गायक को शीर्ष पर चमकने देता है। अपनी आवाज़ को संयमित और धीमा रखना उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसका महान त्याग और मनुष्यता है।
शब्द सीमा: ~47 शब्द
प्र. 17. सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग 'कैप्टन' क्यों कहते थे?
उत्तर: चश्मेवाला कोई फौजी नहीं था, वह शारीरिक रूप से दुर्बल और लंगड़ा फेरीवाला था। परंतु उसके हृदय में देश और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति अगाध श्रद्धा व देशभक्ति थी। नेताजी की मूर्ति को बिना चश्मे के देखकर उसे आहत होती थी। उसकी इसी असीम देशभक्ति भावना के कारण लोग उसे 'कैप्टन' कहते थे।
शब्द सीमा: ~49 शब्द
प्र. 18. हालदार साहब कस्बे के चौराहे पर रुकने से पहले मायूस क्यों हो गए थे?
उत्तर: हालदार साहब इसलिए मायूस हो गए थे क्योंकि उन्हें पता चला कि देशभक्त कैप्टन चश्मेवाले की मृत्यु हो चुकी है। कस्बे में नेताजी की मूर्ति तो होगी, लेकिन अब मास्टर चश्मा बनाना भूल गया था और कैप्टन मर चुका था। उन्हें लगा कि अब मूर्ति हमेशा बिना चश्मे के ही उदास रहेगी।
शब्द सीमा: ~48 शब्द
प्र. 19. मूर्ति पर सरकंडे का छोटा चश्मा देखकर हालदार साहब भावुक क्यों हो उठे?
उत्तर: सरकंडे का चश्मा किसी छोटे बच्चे ने अपने हाथों से बनाकर नेताजी की प्रतिमा पर लगाया था। यह देखकर हालदार साहब को विश्वास हो गया कि देश की नई पीढ़ी में भी देशभक्ति और महापुरुषों के प्रति आदर की भावना जीवित है। देश का भविष्य सुरक्षित जानकर उनकी आँखें भर आईं।
शब्द सीमा: ~47 शब्द
प्र. 20. बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?
उत्तर: बालगोबिन भगत कड़ाके की सर्दी में भी भोर में उठकर दो मील दूर नदी स्नान को जाते थे। वे हर नियम का कठोरता से पालन करते, किसी की वस्तु बिना पूछे न छूते और दिन-रात कबीर के पदों को गाते रहते थे। वृद्धावस्था में भी उनका ऐसा अखंड, कठिन नियम-व्रत देखकर लोग हैरान रह जाते थे।
शब्द सीमा: ~49 शब्द
प्र. 21. भगत ने अपने इकलौते बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त कीं?
उत्तर: बेटे की मृत्यु पर भगत रोए नहीं, बल्कि उन्होंने शांत भाव से शव पर फूल बिखेरे, दीपक जलाया और कबीर के पद गाते रहे। उन्होंने अपनी पुत्रवधू से कहा कि यह शोक मनाने का नहीं, बल्कि उत्सव मनाने का समय है, क्योंकि विरहिणी आत्मा अपने प्रियतम परमात्मा से मिलने चली गई है।
शब्द सीमा: ~49 शब्द
प्र. 22. बालगोबिन भगत कबीर को 'साहब' क्यों मानते थे?
उत्तर: बालगोबिन भगत कबीर के विचारों, सादगी और आदर्शों से अत्यधिक प्रभावित थे। वे कबीर के दिखाए सत्य, पवित्रता और आडंबरहीन जीवन मार्ग पर चलते थे। अपने खेत में उत्पन्न होने वाली सारी उपज वे पहले कबीरपंथी मठ में भेंट स्वरूप ले जाते और जो प्रसाद रूप में मिलता, उसी से संतोषपूर्वक निर्वाह करते थे।
शब्द सीमा: ~49 शब्द
प्र. 23. नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर: नवाब साहब ने सीट पर तौलिया बिछाया, लोटे के पानी से खिड़की के बाहर खीरों को धोया और तौलिए से पोंछा। फिर जेब से चाकू निकालकर खीरों के सिर काटे, झाग निकाला, बड़े सलीके से छीला और फाँकों पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च बुरककर अद्भुत रईसी प्रदर्शन प्रस्तुत किया।
शब्द सीमा: ~47 शब्द
प्र. 24. लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से लगा कि वे बातचीत के इच्छुक नहीं हैं?
उत्तर: जैसे ही लेखक ट्रेन के डिब्बे में चढ़ा, नवाब साहब की आँखों में एकांत चिंतन में बाधा पड़ने का असंतोष दिखाई दिया। उन्होंने लेखक की ओर देखने से परहेज़ किया, कोई बातचीत शुरू नहीं की और खिड़की से बाहर देखकर उपेक्षा प्रदर्शित की। इससे लेखक को उनकी अनिच्छा का स्पष्ट आभास हुआ।
शब्द सीमा: ~49 शब्द
प्र. 25. 'लखनवी अंदाज़' पाठ के माध्यम से लेखक यशपाल ने किस वर्ग पर व्यंग्य किया है?
उत्तर: लेखक ने उस सामंती और नवाबियत मानसिकता वाले ढोंगी वर्ग पर तीखा व्यंग्य किया है, जो वास्तविकता से कटकर केवल झूठी शान, दिखावे और बनावटी जीवनशैली में जीता है। लेखक का स्पष्ट मानना है कि बिना ठोस कथ्य, यथार्थ घटना और पात्रों के न तो कहानी बन सकती है और न समाज।
शब्द सीमा: ~48 शब्द
प्र. 26. लेखिका मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व पर उनके पिता का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: लेखिका के पिता ने उन्हें चारदीवारी से निकालकर देश, समाज और राजनीति के प्रति जागरूक बनाया। घर में होने वाली राजनीतिक बहसों ने उनके भीतर निर्भीकता और आत्मसम्मान भरा। हालांकि पिता के शक्की स्वभाव और दकियानूसी सोच के विरुद्ध लेखिका ने जीवन भर आंतरिक द्वंद्व और विद्रोह का सामना भी किया।
शब्द सीमा: ~47 शब्द
प्र. 27. मन्नू भंडारी के पिता के स्वभाव की अंतर्विरोधी विशेषताएँ क्या थीं?
उत्तर: लेखिका के पिता एक ओर अत्यंत दरियादिल, संवेदनशील, बुद्धिजीवी और शिक्षा के समर्थक थे; वहीं दूसरी ओर वे अत्यधिक क्रोधी, अहंकारी और शक्की स्वभाव के थे। वे जहाँ बेटी को देश-समाज में आगे देखना चाहते थे, वहीं उसे घर की मर्यादाओं और रसोई की सीमा में भी बाँधना चाहते थे।
शब्द सीमा: ~48 शब्द
प्र. 28. उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की 'मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा गया है?
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ ने शहनाई जैसे लोकवाद्य को शास्त्रीय संगीत के सर्वोच्च मंच पर प्रतिष्ठित किया। वे अस्सी वर्षों तक खुदा से केवल सच्चे सुर की नेमत माँगते रहे। भारत में किसी भी शुभ कार्य, शादी-विवाह या मंदिर-मजार पर उनकी शहनाई की गूंज मंगलमय वातावरण का अनिवार्य प्रतीक बन गई।
शब्द सीमा: ~47 शब्द
प्र. 29. मुहर्रम के दिनों में बिस्मिल्ला खाँ का व्यवहार किस प्रकार बदल जाता था?
उत्तर: मुहर्रम के पवित्र दिनों में बिस्मिल्ला खाँ शोक का गंभीर भाव अपनाते थे। वे पूरे दस दिनों तक कोई राग-रागिनी नहीं बजाते थे। आठवीं तारीख को वे दालमंडी से फातमान तक लगभग आठ किलोमीटर पैदल रोते हुए नौहा बजाते थे। उनका हृदय हज़रत इमाम हुसैन के बलिदान से विह्वल रहता था।
शब्द सीमा: ~48 शब्द
प्र. 30. लेखक के अनुसार वास्तविक अर्थों में 'संस्कृत व्यक्ति' किसे कहा जा सकता है?
उत्तर: लेखक के अनुसार संस्कृत व्यक्ति वह है जो अपनी प्रज्ञा, मौलिक बुद्धि और चेतना से मानवता के कल्याण के लिए किसी नए तथ्य या अविष्कार की खोज करता है। जिसमें दूसरों के सुख और भलाई के लिए सर्वस्व त्याग करने की सहज भावना होती है, वही सच्चा सुसंस्कृत मानव कहलाता है।
शब्द सीमा: ~47 शब्द

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