Class 12th Hindi Sample Paper 2027 MP Board Full Solution || कक्षा 12वीं हिन्दी अभ्यास प्रश्न पत्र हल सहित वार्षिक परीक्षा 2027 एमपी बोर्ड

कक्षा 12वीं हिन्दी - महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (प्रश्न 6 से 23) | Mains Education
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कक्षा 12वीं हिन्दी - अभ्यास प्रश्न पत्र 2027 (पूर्ण उत्तरमाला: प्रश्न 6 से 23)

प्रश्न 6: भारतेंदु युगीन काव्य की कोई दो विशेषताएँ लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: भारतेंदु युगीन काव्य की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति: इस काल के काव्य में राष्ट्रीय चेतना, स्वदेश प्रेम और देश की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त की गई है।
  • सामाजिक चेतना और सुधार: समाज में व्याप्त रूढ़ियों, अंधविश्वासों, छुआछूत और पाखंड का विरोध तथा समाज सुधार की भावना इस काव्य का मुख्य स्वर रही है।

प्रश्न 7: छोटे चौकोने खेत को कागज का पन्ना क्यों कहा गया है? (2 अंक)

उत्तर: छोटे चौकोने खेत को कागज का पन्ना इसलिए कहा गया है क्योंकि जिस प्रकार एक कागज के पन्ने पर लिखने से विचारों की रचना होती है और शब्द-बीज बोए जाते हैं, उसी प्रकार छोटा चौकोना खेत भी कल्पना और सृजन का आधार बनता है। दोनों में ही रचनाशीलता और उत्पादन की प्रक्रिया एक जैसी होती है।

प्रश्न 8: सांगरूपक अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: सांगरूपक अलंकार: जहाँ उपमेय पर उपमान का अंगों सहित (समस्त अंगों के साथ) आरोप किया जाता है, वहाँ सांगरूपक अलंकार होता है।

उदाहरण: "पहिचानी रामु भए मगन हिय रोअवलि मोचति नीरु।" यहाँ राम के दर्शन से उत्पन्न आनंद का सांगरूपक प्रस्तुत किया गया है।

प्रश्न 9: बिंब विधान किसे कहते हैं? उदाहरण सहित लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: कविता या साहित्य में शब्दों के माध्यम से जब मानसिक पटल पर कोई सजीव दृश्य, चित्र या संवेदना साकार होती है, तो उसे बिंब-विधान कहते हैं।

उदाहरण: "उषा का जादू टूट रहा है।" (दृश्य बिंब का सुंदर उदाहरण)

प्रश्न 10: रेखाचित्र एवं संस्मरण में कोई दो अंतर लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: रेखाचित्र और संस्मरण में मुख्य दो अंतर:

  • आधार: रेखाचित्र में लेखक किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना के बाह्य और आंतरिक स्वरूप का कलात्मक रेखांकन करता है; जबकि संस्मरण लेखक की स्मृति पर आधारित किसी विशिष्ट घटना या व्यक्ति के संस्मरण पर आधारित होता है।
  • कल्पना की प्रधानता: रेखाचित्र में रूप-चित्र उभारने के लिए कल्पना का हल्का पुट हो सकता है, जबकि संस्मरण पूरी तरह सत्य घटनाओं और वास्तविक स्मृतियों पर आधारित होता है।

प्रश्न 11: 'मेंढक मंडली' पर पानी फेंके जाने के पक्ष में जीजी ने क्या तर्क दिया? लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: जीजी ने तर्क दिया कि यदि हम इंद्र सेना (मेंढक मंडली) पर पानी नहीं फेंकेंगे, तो हम इंद्र भगवान को अर्ध्य (पानी) कैसे चढ़ाएंगे? त्याग के बिना फल नहीं मिलता। ऋषि-मुनियों ने भी दान को सबसे बड़ा महत्व दिया है। जब तक पानी की बुआई नहीं करेंगे, तब तक बादलों से पानी कैसे मिलेगा?

प्रश्न 12: राष्ट्रभाषा एवं राजभाषा में दो प्रमुख अंतर लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: राष्ट्रभाषा और राजभाषा में दो प्रमुख अंतर:

  • व्यापकता: राष्ट्रभाषा पूरे देश के बहुमत नागरिकों द्वारा बोली और समझी जाने वाली भाषा है, जबकि राजभाषा देश के सरकारी कामकाज, प्रशासन और न्यायपालिका की आधिकारिक भाषा होती है।
  • संवैधानिक स्थिति: राष्ट्रभाषा जनमानस की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, जबकि राजभाषा संविधान द्वारा अधिकृत रूप से स्वीकृत प्रशासनिक भाषा होती है (जैसे भारत की राजभाषा हिंदी है)।

प्रश्न 13: अर्थ के आधार पर वाक्य कितने प्रकार के होते हैं? उनके नाम लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: अर्थ के आधार पर वाक्य 8 प्रकार के होते हैं:

  1. विधानवाचक वाक्य
  2. निषेधवाचक वाक्य
  3. प्रश्नवाचक वाक्य
  4. आज्ञावाचक वाक्य
  5. विस्मयबोधक वाक्य
  6. इच्छावाचक वाक्य
  7. संकेतवाचक वाक्य
  8. संदिग्धवाचक वाक्य

प्रश्न 14: 'जूझ' शीर्षक का औचित्य क्या है? लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: 'जूझ' शीर्षक इस उपन्यास के केंद्रीय भाव यानी 'संघर्ष' को पूरी तरह चरितार्थ करता है। लेखक (आनंद यादव) ने प्रतिकूल पारिवारिक परिस्थितियों, पिता के विरोध और सामाजिक अभावों के बीच जिस प्रकार अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए निरंतर संघर्ष (जूझ) किया, वही इस आत्मकथात्मक अंश का मूल प्राण है। अतः 'जूझ' शीर्षक पूर्णतः सार्थक और औचित्यपूर्ण है।

प्रश्न 15: फीचर किसे कहते हैं? लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: फीचर एक सुनियोजित, सुव्यवस्थित और मनोरंजक आलेख होता है, जो किसी घटना, समस्या या व्यक्ति विशेष पर आधारित होता है। इसका मुख्य उद्देश्य पाठकों को सूचना देने के साथ-साथ उनका मनोरंजन करना और ज्ञानवर्धन करना होता है। इसमें तथ्यों के साथ लेखक की रचनात्मक शैली भी जुड़ी होती है।

प्रश्न 16: सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' अथवा शमशेर बहादुर सिंह की काव्यगत विशेषताएँ लिखिए। (3 अंक)

सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला':

  • दो रचनाएँ: अनामिका, परिमल।
  • भावपक्ष: निराला जी का काव्य ओज, विद्रोह, करुणा और प्रगतिवादी चेतना से ओत-प्रोत है। प्रकृति प्रेम के साथ-साथ शोषितों के प्रति गहरी सहानुभूति उनके काव्य का मुख्य आधार है।
  • साहित्य में स्थान: छायावाद के प्रमुख स्तंभों में गिने जाने वाले निराला जी को हिंदी कविता में 'मुक्त छंद' का प्रवर्तक माना जाता है।

अथवा (शमशेर बहादुर सिंह):

  • दो रचनाएँ: चुका हूँ मैं नहीं, इतने पास अपने।
  • भावपक्ष: उनकी कविताओं में प्रेम, प्रकृति, सौंदर्य और अकेलापन बहुत ही सुकोमल रूपों में उभरा है। वे बिंबधर्मी कवि के रूप में जाने जाते हैं।
  • साहित्य में स्थान: उन्हें 'कवियों के कवि' के रूप में हिंदी साहित्य में विशिष्ट और आदरणीय स्थान प्राप्त है।

प्रश्न 17: फणीश्वरनाथ रेणु अथवा महादेवी वर्मा की साहित्यिक विशेषताएँ लिखिए। (3 अंक)

महादेवी वर्मा:

  • दो रचनाएँ: यामा, दीपशिखा (काव्य); गिल्लू, रेखाचित्र (गद्य)।
  • भाषा-शैली: उनकी भाषा अत्यंत परिष्कृत, संस्कृतनिष्ठ और चित्रात्मक है। शैली में भावुकता, संगीतात्मकता और मार्मिकता कूट-कूट कर भरी है।
  • साहित्य में स्थान: महादेवी वर्मा को 'आधुनिक मीरा' कहा जाता है। छायावादी चार स्तंभों में वे गद्य और पद्य दोनों क्षेत्रों में अप्रतिम योगदान के लिए स्मरणीय हैं।

अथवा (फणीश्वरनाथ रेणु):

  • दो रचनाएँ: मैला आंचल, परती परिकथा।
  • भाषा-शैली: आंचलिक शब्दावली, लोकगीतों के प्रयोग और जीवंत भाषा-शैली ने उनकी रचनाओं को सजीव बना दिया है।
  • साहित्य में स्थान: हिंदी साहित्य में 'आंचलिक उपन्यास' के जनक और शिखर पुरुष के रूप में रेणु जी को सर्वोपरि स्थान प्राप्त है।

प्रश्न 18: 'भारतीय संस्कृति' पर सारगर्भित अनुच्छेद लिखिए अथवा विद्यालयी हिंदी दिवस विज्ञापन। (3 अंक)

भारतीय संस्कृति:

भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम और जीवित संस्कृतियों में से एक है जिसका मूल आधार "वसुधैव कुटुंबकम्" (संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार है) और "सर्वे भवन्तु सुखिनः" की भावना है। यहाँ अनेक जातियां, भाषाएं और संप्रदाय होने के बावजूद 'अनेक में एकता' हमारी सांस्कृतिक विशेषता है। यह संस्कृति त्याग, सहिष्णुता, आध्यात्मिकता और नैतिकता का अनूठा संगम है जो आधुनिक युग में भी संपूर्ण मानवता को शांति और सद्भाव का संदेश देती है।


अथवा (हिंदी दिवस विज्ञापन प्रारूप):

विशेष आमंत्रण!
आदर्श कॉन्वेंट उ.मा. विद्यालय, ब्यावरा
दिनांक: 14 सितंबर - हिंदी दिवस समारोह
"हिन्दी हमारी आन, बान और शान है!"
वक्ता: प्रख्यात साहित्यकार | स्थान: विद्यालय सभागार
समस्त छात्र-छात्राएं सादर आमंत्रित हैं!

प्रश्न 19: अपठित गद्यांश अथवा काव्यांश के प्रश्नोत्तर लिखिए। (3 अंक)

गद्यांश आधारित उत्तर:

  • i. उपयुक्त शीर्षक: सृजन का प्रकाश / जीवन का वास्तविक प्रकाश
  • ii. पीताभ गेहूँ के पौधे क्या संदेश देते हैं?: पीताभ गेहूँ के पौधे यह संदेश देते हैं कि सृजन (निर्माण) की यात्रा कभी रुकती नहीं है, इसे अंधेरे और विपरीत परिस्थितियों में भी रोका नहीं जा सकता।
  • iii. सारांश: लेखक का कहना है कि मानव जीवन का असली प्रकाश सृजन का प्रकाश है। आचरण, शील, श्रम और विवेक से बड़े से बड़े अंधेरे को मिटाया जा सकता है। सृजन की गति निरंतर और अबाध रहती है।

प्रश्न 20: काव्यांश का संदर्भ-प्रसंग सहित भावार्थ लिखिए। (4 अंक)

संदर्भ: यह काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के अंतर्गत हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित कविता 'आत्मपरिचय' से अवतरित है।

प्रसंग: कवि ने अपने जीवन के अंतर्विरोधों, दुखों के बीच छिपे प्रेम और अपने राजाओं जैसे वैभवशाली महलों के त्याग व खंडहर रूपी जीवन के यथार्थ का सुंदर चित्रण किया है।

भावार्थ: कवि कहते हैं कि भले ही उनके जीवन में रुदन (दुख) हो, लेकिन उस रुदन के भीतर भी प्रेम का संगीत (राग) छिपा हुआ है। उनकी वाणी भले ही शीतल और शांत लगती हो, परंतु उसमें विद्रोह और क्रांति की आग सुलग रही है। जिस प्रकार के महलों और वैभव पर बड़े-बड़े राजाओं का साम्राज्य न्यौछावर हो सकता है, कवि उसी वैभव के नष्ट होने पर बचे हुए 'खंडहर का भाग' यानी अपनी महान स्मृतियों को अपने साथ लेकर चल रहा है।

प्रश्न 21: गद्यांश की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या लिखिए। (4 अंक)

संदर्भ: यह गद्यांश हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित निबंध 'शिरीष के फूल' से लिया गया है।

प्रसंग: लेखक ने कालिदास की रचनाधर्मिता और उनके अनासक्त योगी स्वरूप की तुलना साधारण रचनाकारों से करते हुए उनके संतुलित व महान व्यक्तित्व को स्पष्ट किया है।

व्याख्या: लेखक कहते हैं कि संस्कृत के महान कवि कालिदास अपने कृतित्व में वजन और संतुलन इसलिए बनाए रख पाए क्योंकि वे जीवन के प्रति अनासक्त योगी जैसी स्थिर-प्रज्ञता (स्थिर बुद्धि) और एक सच्चे विदग्ध (अनुभवी व मर्मज्ञ) प्रेमी का हृदय रखते थे। केवल कविता लिख देने, छंद बनाने या तुकबंदी कर लेने से कोई कालिदास नहीं बन जाता। साधारण कवि और महाकवि कालिदास की श्रेणी में जमीन-आसमान का अंतर होता है, क्योंकि महानता केवल कला में नहीं, बल्कि जीवन की गहरी दृष्टि और अनासक्ति में छिपी होती है।

प्रश्न 22: अंकसूची की द्वितीय प्रति हेतु आवेदन पत्र लिखिए अथवा मित्र को बधाई पत्र। (4 अंक)

अंकसूची की द्वितीय प्रति हेतु आवेदन पत्र:

प्रति,
सचिव महोदय,
माध्यमिक शिक्षा मंडल, भोपाल (म.प्र.)

विषय: हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी परीक्षा की अंकसूची की द्वितीय प्रति भेजने बाबत।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं संजय कुमार, आपके विद्यालय/बोर्ड का नियमित छात्र रहा हूँ। मैंने वर्ष 2011 की हायर सेकेण्डरी परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। दुर्भाग्यवश, गत दिनों घर में आग लगने/यात्रा के दौरान मेरी मूल अंकसूची गुम हो गई है।

अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि मेरी अंकसूची की द्वितीय प्रति (Duplicate Marksheet) उपलब्ध कराने की कृपा करें। इस हेतु आवश्यक शुल्क रुपये ....... का चालान/ड्रॉफ्ट संलग्न है।

संलग्नक:
1. निर्धारित शुल्क रसीद
2. एफिडेविट एवं पुलिस रिपोर्ट की प्रति

दिनांक: 01.11.2026
स्थान: ब्यावरा (म.प्र.)
भवदीय,
संजय कुमार

प्रश्न 23: निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर रूपरेखा सहित सारगर्भित निबंध लिखिए। (4 अंक)

विषय: विद्यार्थी जीवन में अनुशासन

रूपरेखा:
1. प्रस्तावना (अनुशासन का अर्थ)
2. विद्यार्थी जीवन और अनुशासन का संबंध
3. अनुशासन के लाभ एवं महत्त्व
4. आधुनिक समय में अनुशासनहीनता की समस्या
5. उपसंहार

निबंध:
1. प्रस्तावना: अनुशासन शब्द 'शासन' के आगे 'अनु' उपसर्ग लगने से बना है जिसका अर्थ है- शासन के अनुकूल चलना या नियमों का पालन करना। प्रकृति स्वयं एक महान अनुशासित व्यवस्था है जहाँ सूर्य, चंद्रमा, ऋतुएँ और नदियाँ सभी निश्चित नियमों से संचालित होती हैं।

2. विद्यार्थी जीवन और अनुशासन: विद्यार्थी जीवन मानव जीवन की वह नींव है जिस पर भविष्य का पूरा भवन खड़ा होता है। यह काल सीखने, गढ़ने और संस्कार ग्रहण करने का है। यदि इस स्वर्णकाल में छात्र ने अनुशासन का पाठ पढ़ लिया, तो उसका संपूर्ण जीवन सफल हो जाता है।

3. अनुशासन के लाभ: अनुशासित छात्र समय का सदुपयोग करता है, अपने गुरुजनों और बड़ों का आदर करता है तथा मानसिक रूप से एकाग्र होकर लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर रहता है। अनुशासन से जीवन में व्यवस्था, शांति और सफलता स्वतः आने लगती है।

4. उपसंहार: अंततः अनुशासन किसी पर थोपा गया बंधन नहीं, बल्कि आत्मसंयम और कर्तव्यनिष्ठा का दूसरा नाम है। विद्यार्थी ही देश का भविष्य हैं, अतः उन्हें अनुशासित होकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।

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