Class10th Political Science Most Important Questions Half Yearly Exam 2026-27

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Class 10th Political Science

NCERT – Democratic Politics-II

⭐ Most Important Questions & Answers ⭐

MP Board | परीक्षा उपयोगी सामग्री

📖 Class 10th Political Science

यहाँ कक्षा 10वीं Political Science के प्रत्येक अध्याय से 5-5 Most Important Questions और Answers दिए गए हैं। ये प्रश्न Board Exam, Revision और परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी हैं।

📌 अध्याय 1 – सत्ता की साझेदारी

प्रश्न 1. सत्ता की साझेदारी से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी का अर्थ है कि शासन की शक्ति को समाज के विभिन्न समूहों, संस्थाओं और सरकार के विभिन्न अंगों के बीच बाँटा जाए।

प्रश्न 2. बेल्जियम में सत्ता की साझेदारी कैसे की गई?

उत्तर: बेल्जियम में विभिन्न भाषाई समुदायों के बीच सत्ता का संतुलन बनाया गया। केंद्रीय सरकार में डच और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या बराबर रखी गई और समुदायों को अपने-अपने विषयों पर अधिकार दिए गए।

प्रश्न 3. श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद का क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: श्रीलंका में बहुसंख्यक सिंहली समुदाय को विशेष महत्व देने वाली नीतियों के कारण तमिल समुदाय में असंतोष बढ़ा और सामाजिक तथा राजनीतिक संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई।

प्रश्न 4. सत्ता की साझेदारी क्यों आवश्यक है?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी सामाजिक संघर्ष को कम करती है, विभिन्न समुदायों में विश्वास बढ़ाती है और लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

प्रश्न 5. सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा क्यों मानी जाती है?

उत्तर: लोकतंत्र में सभी नागरिकों और सामाजिक समूहों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। सत्ता की साझेदारी विभिन्न समूहों को शासन में भाग लेने का अवसर देती है।

📌 अध्याय 2 – संघवाद

प्रश्न 1. संघवाद क्या है?

उत्तर: संघवाद ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें सत्ता का विभाजन केंद्रीय सरकार और राज्य या प्रांतीय सरकारों के बीच संविधान द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 2. संघीय शासन व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर: इसमें दो या अधिक स्तर की सरकारें होती हैं, संविधान द्वारा शक्तियों का विभाजन होता है और प्रत्येक स्तर की सरकार अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करती है।

प्रश्न 3. भारत में कितने स्तर की सरकारें हैं?

उत्तर: भारत में संघ, राज्य और स्थानीय स्तर पर सरकारें कार्य करती हैं। इस प्रकार भारत में शासन के तीन स्तर हैं।

प्रश्न 4. भारत में भाषाई राज्यों का गठन क्यों किया गया?

उत्तर: भाषाई आधार पर राज्यों के गठन से लोगों को अपनी भाषा और संस्कृति के अनुसार प्रशासनिक पहचान मिली तथा संघीय व्यवस्था अधिक मजबूत हुई।

प्रश्न 5. भारत में संघवाद को मजबूत करने वाले दो उपाय लिखिए।

उत्तर: भाषाई राज्यों का गठन और स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक दर्जा देना भारत में संघवाद को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण उपाय हैं।

📌 अध्याय 3 – जाति, धर्म और लैंगिक मसले

प्रश्न 1. लैंगिक विभाजन से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: समाज में महिलाओं और पुरुषों के कार्यों, भूमिकाओं तथा अधिकारों के आधार पर किया जाने वाला सामाजिक विभाजन लैंगिक विभाजन कहलाता है।

प्रश्न 2. भारत में महिलाओं की राजनीतिक स्थिति सुधारने के लिए क्या प्रयास किए गए?

उत्तर: स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रयास किए गए हैं।

प्रश्न 3. सांप्रदायिकता क्या है?

उत्तर: जब किसी धर्म को राजनीति में प्रमुख आधार बनाकर दूसरे धार्मिक समुदायों के हितों को विरोधी माना जाता है, तो ऐसी राजनीति को सांप्रदायिकता कहा जाता है।

प्रश्न 4. जाति व्यवस्था राजनीति को कैसे प्रभावित करती है?

उत्तर: राजनीति में जातीय पहचान उम्मीदवारों के चयन, मतदान और राजनीतिक समर्थन को प्रभावित कर सकती है। साथ ही राजनीति भी जातीय समूहों की मांगों को प्रभावित करती है।

प्रश्न 5. भारतीय संविधान धर्म के संबंध में क्या व्यवस्था करता है?

उत्तर: भारत में सभी धर्मों को समान सम्मान दिया जाता है और नागरिकों को अपने धर्म को मानने तथा उसका पालन करने की स्वतंत्रता प्राप्त है।

📌 अध्याय 4 – राजनीतिक दल

प्रश्न 1. राजनीतिक दल क्या है?

उत्तर: राजनीतिक दल लोगों का ऐसा संगठित समूह है जो चुनाव लड़कर सरकार बनाने और अपनी नीतियों को लागू करने का प्रयास करता है।

प्रश्न 2. राजनीतिक दल के प्रमुख कार्य क्या हैं?

उत्तर: राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं, नीतियाँ और कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं, सरकार बनाते हैं, विपक्ष की भूमिका निभाते हैं और जनता तथा सरकार के बीच कड़ी का काम करते हैं।

प्रश्न 3. भारत में बहुदलीय व्यवस्था क्यों है?

उत्तर: भारत एक विशाल और विविधतापूर्ण देश है। यहाँ विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, समुदायों और विचारों का प्रतिनिधित्व करने वाले अनेक राजनीतिक दल हैं।

प्रश्न 4. राजनीतिक दलों के सामने प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?

उत्तर: राजनीतिक दलों के सामने आंतरिक लोकतंत्र की कमी, वंशवाद, धन और अपराध का प्रभाव तथा मतदाताओं को सार्थक विकल्प देने जैसी चुनौतियाँ हैं।

प्रश्न 5. विपक्षी दल की क्या भूमिका होती है?

उत्तर: विपक्षी दल सरकार की नीतियों की आलोचना करता है, सरकार को जवाबदेह बनाता है और जनता के सामने वैकल्पिक नीतियाँ प्रस्तुत करता है।

📌 अध्याय 5 – लोकतंत्र के परिणाम

प्रश्न 1. लोकतंत्र में जवाबदेह सरकार से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है और उसे अपने निर्णयों तथा कार्यों के लिए जनता और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जवाब देना पड़ता है।

प्रश्न 2. लोकतंत्र में निर्णय लेने की प्रक्रिया कैसी होती है?

उत्तर: लोकतंत्र में निर्णय चर्चा, विचार-विमर्श और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से लिए जाते हैं।

प्रश्न 3. लोकतंत्र नागरिकों की गरिमा कैसे बढ़ाता है?

उत्तर: लोकतंत्र सभी नागरिकों को समान अधिकार और राजनीतिक भागीदारी का अवसर देता है। इससे नागरिकों की स्वतंत्रता और गरिमा को बढ़ावा मिलता है।

प्रश्न 4. लोकतंत्र में आर्थिक असमानता की समस्या क्यों बनी रहती है?

उत्तर: लोकतंत्र राजनीतिक समानता स्थापित करता है, लेकिन आर्थिक संसाधनों और अवसरों का वितरण हमेशा समान नहीं होता। इसलिए आर्थिक असमानता बनी रह सकती है।

प्रश्न 5. लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम क्या है?

उत्तर: लोकतंत्र नागरिकों को सरकार चुनने, शासन में भाग लेने और सरकार को जवाबदेह बनाने का अवसर देता है।

📌 अध्याय 6 – लोकतंत्र की चुनौतियाँ

प्रश्न 1. लोकतंत्र की चुनौती से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह, पारदर्शी और सहभागी बनाने के रास्ते में आने वाली समस्याओं को लोकतंत्र की चुनौतियाँ कहा जाता है।

प्रश्न 2. लोकतंत्र की प्रमुख चुनौतियाँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर: लोकतंत्र के सामने आधारभूत चुनौती, विस्तार की चुनौती और लोकतंत्र को गहरा करने की चुनौती प्रमुख हैं।

प्रश्न 3. आधारभूत चुनौती क्या है?

उत्तर: जहाँ लोकतंत्र की स्थापना अभी पूरी तरह नहीं हुई है, वहाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करना आधारभूत चुनौती कहलाती है।

प्रश्न 4. लोकतंत्र को गहरा करने की चुनौती क्या है?

उत्तर: लोकतंत्र को अधिक सहभागी, पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना तथा सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना लोकतंत्र को गहरा करने की चुनौती है।

प्रश्न 5. लोकतांत्रिक सुधारों का क्या उद्देश्य है?

उत्तर: लोकतांत्रिक सुधारों का उद्देश्य लोकतंत्र की संस्थाओं को मजबूत करना, जनभागीदारी बढ़ाना और शासन को अधिक जवाबदेह तथा पारदर्शी बनाना है।

📌 अध्याय 7 – संघवाद और लोकतंत्र का विस्तार

प्रश्न 1. स्थानीय स्वशासन क्या है?

उत्तर: स्थानीय स्तर पर लोगों द्वारा चुनी गई संस्थाओं के माध्यम से स्थानीय मामलों का संचालन स्थानीय स्वशासन कहलाता है।

प्रश्न 2. पंचायती राज व्यवस्था का क्या महत्व है?

उत्तर: पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाती है और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने का अवसर देती है।

प्रश्न 3. नगरपालिकाएँ क्या कार्य करती हैं?

उत्तर: नगरपालिकाएँ शहरी क्षेत्रों में सफाई, सड़क, पानी, स्वास्थ्य और अन्य स्थानीय सेवाओं से संबंधित कार्य करती हैं।

प्रश्न 4. स्थानीय सरकारों में महिलाओं के लिए आरक्षण क्यों दिया गया?

उत्तर: महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें स्थानीय शासन में निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने के लिए आरक्षण दिया गया।

प्रश्न 5. स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र को कैसे मजबूत करता है?

उत्तर: यह नागरिकों को शासन के निकट लाता है और उन्हें स्थानीय समस्याओं के समाधान तथा निर्णय लेने में सीधे भाग लेने का अवसर देता है।

📌 अध्याय 8 – लोकतांत्रिक राजनीति का महत्व

प्रश्न 1. लोकतंत्र नागरिकों को कौन-कौन से अधिकार देता है?

उत्तर: लोकतंत्र नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, राजनीतिक भागीदारी और कानून के समक्ष समानता जैसे अधिकारों की सुरक्षा प्रदान करता है।

प्रश्न 2. लोकतंत्र और समानता का क्या संबंध है?

उत्तर: लोकतंत्र राजनीतिक समानता पर आधारित है। प्रत्येक नागरिक को मतदान और राजनीतिक भागीदारी का समान अधिकार प्राप्त होता है।

प्रश्न 3. लोकतंत्र में जनता की भूमिका क्या है?

उत्तर: जनता चुनावों के माध्यम से प्रतिनिधियों का चयन करती है और सरकार की नीतियों तथा कार्यों पर अपनी प्रतिक्रिया देती है।

प्रश्न 4. लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव क्यों आवश्यक हैं?

उत्तर: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नागरिकों को अपनी पसंद के प्रतिनिधि चुनने का अवसर देते हैं और सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाते हैं।

प्रश्न 5. लोकतंत्र को सफल बनाने के लिए नागरिकों की क्या भूमिका है?

उत्तर: नागरिकों को मतदान करना चाहिए, कानूनों का पालन करना चाहिए, सार्वजनिक मुद्दों पर जागरूक रहना चाहिए और लोकतांत्रिक संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए।

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