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काव्य खंड - पाठ 5
दुष्यंत कुमार (गज़ल)
1. आखिरी शेर में गुलमोहर के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर: गुलमोहर के माध्यम से कवि मानवीय मूल्यों और आदर्शों की बात करता है। वह कहना चाहता है कि हमें अपने देश में आदर्शों के साथ जीना चाहिए और अगर बाहर मरना पड़े, तो भी इन्हीं मूल्यों के लिए मरना चाहिए।
2. पहले शेर में 'चरागाँ' शब्द एक बार बहुवचन में और दूसरी बार एकवचन में अर्थ की दृष्टि से क्या महत्व रखता है?
उत्तर: बहुवचन 'चरागाँ' ढेर सारी सुविधाओं और अत्यधिक खुशहाली का प्रतीक है (जो हर घर को मिलनी थी)। एकवचन 'चराग' का अर्थ है न्यूनतम सुविधा, जो पूरे शहर को भी मयस्सर (उपलब्ध) नहीं है।
3. गज़ल के तीसरे शेर को ध्यान से पढ़ें- "न हो कमीज तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे / ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए।" यहाँ 'सफ़र' और 'मुनासिब' शब्द किस ओर इशारा कर रहे हैं?
उत्तर: 'सफ़र' का अर्थ भ्रष्ट शासकों के शासनकाल से है, और 'मुनासिब' का अर्थ है उपयुक्त। कवि व्यंग्य कर रहा है कि भारत की शोषित और चुप रहने वाली जनता ऐसे भ्रष्ट नेताओं के राज के लिए सबसे उपयुक्त है।
4. आशय स्पष्ट करें- "तेरा निज़ाम है सिल दे ज़बान शायर की / ये एहतियात ज़रूरी है इस बहर के लिए।"
उत्तर: इसका आशय है कि सत्ताधारी शासक हमेशा विरोध की आवाज़ को दबाने की कोशिश करते हैं। कवि कहता है कि शासकों को अपनी सत्ता (बहर) बचाए रखने के लिए कवियों (शायर) की ज़बान बंद करना ज़रूरी लगता है।
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