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काव्य खंड - पाठ 6
अक्कमहादेवी
1. 'लक्ष्य प्राप्ति में इंद्रियाँ बाधक होती हैं' - इसके संदर्भ में अपने तर्क दीजिए।
उत्तर: कवयित्री के अनुसार, मानव की इंद्रियाँ (भूख, प्यास, नींद, मोह आदि) उसे भौतिक सुखों में उलझाकर लक्ष्य से भटकाती हैं। ईश्वर प्राप्ति के सच्चे मार्ग पर चलने के लिए इन इंद्रियों पर नियंत्रण पाना अत्यंत आवश्यक है।
2. 'ओ चर-अचर! मत चूक- अवसर' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इसका आशय है कि यह मानव जीवन ईश्वर की भक्ति और मोक्ष प्राप्ति का एक सुनहरा अवसर है। कवयित्री जड़-चेतन सभी को सचेत करती हैं कि शिव (चन्नमल्लिकार्जुन) की आराधना का यह अवसर बिल्कुल नहीं चूकना चाहिए।
3. ईश्वर के लिए किस दृष्टांत का प्रयोग किया गया है? ईश्वर और उसके साम्य का आधार बताइए।
उत्तर: कवयित्री ने ईश्वर के लिए 'जूही के फूल' का दृष्टांत दिया है। जैसे जूही का फूल कोमल, पवित्र और सुगंधित होता है, वैसे ही उनके आराध्य शिव भी परम पवित्र, कोमल और सबको आनंद प्रदान करने वाले हैं।
4. 'अपना घर' से क्या तात्पर्य है? इसे भूलने की बात क्यों कही गई है?
उत्तर: 'अपना घर' से तात्पर्य सांसारिक मोह-माया, स्वार्थ और भौतिक सुख-सुविधाओं से है। इसे भूलने की बात इसलिए कही गई है क्योंकि सांसारिक मोह को छोड़े बिना ईश्वर के प्रति सच्चा समर्पण और भक्ति संभव नहीं है।
5. दूसरे वचन में ईश्वर से क्या कामना की गई है और क्यों?
उत्तर: कवयित्री ईश्वर से कामना करती हैं कि उनका सब कुछ छिन जाए और उन्हें भीख माँगनी पड़े। वे अपने अहंकार को पूरी तरह नष्ट करके परम वैराग्य पाना चाहती हैं, ताकि वे केवल ईश्वर में लीन हो सकें।
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