काव्य गुण किसे कहते हैं यह कितने प्रकार के होते हैं ? माधुर्य गुण की परिभाषा उदाहरण सहित , ओज गुण की परिभाषा उदाहरण सहित, प्रसाद गुण की परिभाषा उदाहरण सहित।
- Get link
- X
- Other Apps
प्रश्न 1. काव्य गुण किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं?
काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तथा रस को उत्कर्ष (आनंद) प्रदान करने वाले स्थायी धर्मों को काव्य गुण कहते हैं। जिस प्रकार मनुष्य में वीरता और दया गुण होते हैं, वैसे ही काव्य में गुण होते हैं। मुख्य रूप से काव्य गुण तीन प्रकार के होते हैं— 1. माधुर्य गुण, 2. ओज गुण और 3. प्रसाद गुण।
प्रश्न 2. माधुर्य गुण की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए?
जिस काव्य को पढ़ने या सुनने से हृदय में मधुरता, प्रेम और आनंद का संचार होता है, वहाँ माधुर्य गुण होता है। यह प्रायः श्रृंगार, शांत और वात्सल्य रस में पाया जाता है।
सरल उदाहरण: 'मैया मोरी, मैं नहिं माखन खायो।' (इसमें बालकृष्ण के वचनों की सरलता व मधुरता है।)
सरल उदाहरण: 'मैया मोरी, मैं नहिं माखन खायो।' (इसमें बालकृष्ण के वचनों की सरलता व मधुरता है।)
प्रश्न 3. ओज गुण की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए?
जिस काव्य को पढ़ने या सुनने से मन में जोश, उत्साह, उमंग अथवा वीरता का भाव जागृत हो जाए, वहाँ ओज गुण होता है। यह वीर और रौद्र रस की कविताओं में प्रमुखता से मिलता है।
सरल उदाहरण: 'बुंदेले हरबोलों के मुँह, हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो, झाँसी वाली रानी थी॥'
सरल उदाहरण: 'बुंदेले हरबोलों के मुँह, हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो, झाँसी वाली रानी थी॥'
प्रश्न 4. प्रसाद गुण की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए?
जिस काव्य को पढ़ते या सुनते ही उसका अर्थ तुरंत और सहजता से समझ आ जाए, वहाँ प्रसाद गुण होता है। इसमें भाषा अत्यंत सरल, स्पष्ट और सुबोध होती है।
सरल उदाहरण: 'इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर होना।' (पंक्ति पढ़ते ही अर्थ पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है।)
सरल उदाहरण: 'इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर होना।' (पंक्ति पढ़ते ही अर्थ पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है।)
Comments
Post a Comment