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Class 10th Hindi Chapter 4 Utsah at Nahi Rahi Solution pdf // कक्षा 10वीं हिंदी पाठ 4 उत्साह अट नहीं रही सॉल्यूशन 🔥
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Class 10th Hindi NCERT Chapter - 4 Solution
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सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' - कवि परिचय
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म बंगाल के महिषादल में सन् 1899 में हुआ। वे मूलतः गढ़ाकोला (ज़िला उन्नाव), उत्तर प्रदेश के निवासी थे। निराला की औपचारिक शिक्षा नवीं तक महिषादल में ही हुई। उन्होंने स्वाध्याय से संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी का ज्ञान अर्जित किया। वे संगीत और दर्शनशास्त्र के भी गहरे अध्येता थे। रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद की विचारधारा ने उन पर विशेष प्रभाव डाला।
निराला का पारिवारिक जीवन दुखों और संघर्षों से भरा था। आत्मीय जनों के असामयिक निधन ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया। साहित्यिक मोर्चे पर भी उन्होंने अनवरत संघर्ष किया। सन् 1961 में उनका देहांत हो गया।
उनकी प्रमुख काव्य-रचनाएँ हैं- अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता और नए पत्ते। उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध लेखन में भी उनकी ख्याति अविस्मरणीय है। निराला रचनावली के आठ खंडों में उनका संपूर्ण साहित्य प्रकाशित है।
निराला विस्तृत सरोकारों के कवि हैं। दार्शनिकता, विद्रोह, क्रांति, प्रेम की तरलता और प्रकृति का विराट तथा उदात्त चित्र उनकी रचनाओं में उपस्थित है। उनके विद्रोही स्वभाव ने कविता के भाव-जगत और शिल्प-जगत में नए प्रयोगों को संभव किया। छायावादी रचनाकारों में उन्होंने सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग किया। शोषित, उपेक्षित, पीड़ित और प्रताड़ित जन के प्रति उनकी कविता में जहाँ गहरी सहानुभूति का भाव मिलता है, वहीं शोषक वर्ग और सत्ता के प्रति प्रचंड प्रतिकार का भाव भी।
'उत्साह' - प्रश्नोत्तर
1. कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर 'गरजने' के लिए कहता है, क्यों?
कवि बादल से 'गरजने' को इसलिए कहते हैं क्योंकि बादल क्रांति का प्रतीक है। वह सोई हुई जनता में चेतना और नवजीवन का संचार करना चाहता है। गर्जन विद्रोह और परिवर्तन की आवाज है, जो समाज में व्याप्त कुरीतियों और अन्याय के खिलाफ एक आह्वान है।
2. कविता का शीर्षक उत्साह क्यों रखा गया है?
कविता का शीर्षक 'उत्साह' इसलिए रखा गया है क्योंकि यह कविता बादलों के माध्यम से जन-सामान्य में साहस, उत्साह और क्रांति का संचार करती है। यह कविता सोई हुई जनता को जगाने और परिवर्तन लाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जो उत्साह का भाव जगाती है।
3. कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?
'बादल' यहाँ कई अर्थों का प्रतीक है। पहला, यह पीड़ित-प्यासे जन की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला है। दूसरा, यह नई कल्पना और नए अंकुर के लिए विध्वंस, विप्लव और क्रांति का अग्रदूत है। तीसरा, यह 'नवजीवन' लाने वाला है।
4. शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। उत्साह कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।
'उत्साह' कविता में नाद-सौंदर्य वाले शब्द हैं: "घोर-घोर", "ललित-ललित", "बाल-कल्पना", "विद्युत छवि", "उर में", "वज्र छिपा"। इन शब्दों की आवृत्ति और चयन से कविता में लय और संगीतमयता उत्पन्न हुई है, जो सुनने में मधुर और प्रभावशाली लगती है।
'अट नहीं रही है' - प्रश्नोत्तर
1. छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।
छायावाद की यह विशेषता इन पंक्तियों में दिखती है: "कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो, उड़ने को नभ में तुम, पर-पर कर देते हो।" यहाँ कवि ने फागुन की सुंदरता और मानव हृदय की प्रसन्नता का सुंदर सामंजस्य बिठाया है।
2. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?
फागुन का सौंदर्य इतना व्यापक और मनोहारी है कि कवि की आँखें उसे एक पल के लिए भी नहीं छोड़ पा रही हैं। हर तरफ फैली हरियाली, रंग-बिरंगे फूल और मादकता कवि के मन को मोह लेती है और वह मंत्रमुग्ध हो जाता है।
3. प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?
कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन फागुन की शोभा के माध्यम से किया है। फागुन के आने से चारों तरफ प्रकृति खिल उठी है—पेड़ों पर नए पत्ते, रंग-बिरंगे फूल और हवाओं में फैली महक प्रकृति की सुंदरता को असीम और व्यापक बना देती है।
4. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?
फागुन का मौसम अन्य ऋतुओं से भिन्न है क्योंकि इस समय प्रकृति अपने पूरे यौवन पर होती है। चारों ओर हरियाली और फूलों की महक होती है। फागुन की शोभा इतनी अधिक होती है कि वह न तो समाती है और न ही कहीं टिकती है।
5. इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।
निराला का काव्य-शिल्प अद्वितीय है। उन्होंने मुक्त छंद का प्रयोग किया है। उनकी भाषा में कोमलता और विद्रोह दोनों का मेल है। तत्सम शब्दों के साथ तद्भव शब्दों का सुंदर प्रयोग, नाद-सौंदर्य, प्रतीकात्मकता और मानवीय संवेदनाओं का चित्रण उनके काव्य-शिल्प की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
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