📖 पाठ-सार / परिचयः
प्रस्तुत पाठ पर्यावरण के प्रदूषण और संरक्षण के विषय पर आधारित एक विचारोत्तेजक लघु-निबन्ध है। इसमें बताया गया है कि प्रकृति के पंचतत्त्व (पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश) ही हमारे जीवन के आधार हैं। मनुष्य के स्वार्थ एवं अनियंत्रित औद्योगीकरण से आज वायु, जल और पृथ्वी दूषित हो रहे हैं। अतः प्रकृति की रक्षा से ही मानव जीवन और इस विश्व की रक्षा संभव है।
प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखिए)—
(क) मानवः कुत्र सुरक्षितः तिष्ठति? (मनुष्य कहाँ सुरक्षित रहता है?)
उत्तरम् — पर्यावरणकुक्षौ (पर्यावरण की गोद में)
(ख) सुरक्षितं पर्यावरणं कुत्र उपलभ्यते स्म? (प्राचीनकाल में सुरक्षित पर्यावरण कहाँ मिलता था?)
उत्तरम् — वने (वनों/जंगलों में)
(ग) आर्षवचनं किम् अस्ति? (ऋषियों का वचन क्या है?)
उत्तरम् — 'धर्मो रक्षति रक्षितः' (रक्षित धर्म ही रक्षा करता है)
(घ) पर्यावरणम् अपि कस्य अङ्गम् इति ऋषयः प्रतिपादितवन्तः? (पर्यावरण किसकी अंग है?)
उत्तरम् — धर्मस्य (धर्म का)
(ङ) अजातशिशुः कुत्र सुरक्षितः तिष्ठति? (अजन्मा शिशु कहाँ सुरक्षित रहता है?)
उत्तरम् — मातृगर्भे (माता के गर्भ में)
(च) प्रकृतिः केषां संरक्षणाय यतते? (प्रकृति किसके संरक्षण का यत्न करती है?)
उत्तरम् — सर्वप्राणिनाम् (समस्त प्राणियों के)
प्रश्न 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत (पूर्ण वाक्य में उत्तर)—
(क) प्रकृतेः प्रमुखतत्त्वानि कानि सन्ति? (प्रकृति के प्रमुख तत्त्व कौन-से हैं?)
उत्तरम् — पृथिवी, जलं, तेजः (अग्निः), वायुः, आकाशः च प्रकृतेः प्रमुखतत्त्वानि सन्ति।
(ख) स्वार्थान्धः मानवः किं करोति? (स्वार्थ में अंधा मनुष्य क्या करता है?)
उत्तरम् — स्वार्थान्धः मानवः अद्य पर्यावरणं नाशयति, वृक्षांश्छिन्दन्ति, जलं च दूषयति।
(ग) पर्यावरणे विकृते जाते किं भवति? (पर्यावरण के विकृत होने पर क्या होता है?)
उत्तरम् — पर्यावरणे विकृते जाते विविधाः रोगाः, प्राकृतिकप्रकोपाः भीषणसमस्याः च संभवन्ति।
(घ) अस्माभिः पर्यावरणस्य रक्षा कथं करणीया? (हमें पर्यावरण की रक्षा कैसे करनी चाहिए?)
उत्तरम् — अस्माभिः वृक्षाणां रोपणेन, वापी-कूप-तड़ागादीनां निर्माणेन, जलस्य वायोश्च शुद्धता-रक्षणेन पर्यावरणस्य रक्षा करणीया।
(ङ) लोकरक्षा कथं सम्भवति? (संसार की रक्षा कैसे संभव है?)
उत्तरम् — प्रकृतिरक्षयैव लोकरक्षा सम्भवति।
(च) परिष्कृतं पर्यावरणम् अस्मभ्यं किं किं ददाति? (शुद्ध पर्यावरण हमें क्या-क्या देता है?)
उत्तरम् — परिष्कृतं पर्यावरणम् अस्मभ्यं सांसारिकं जीवनसुखं, सद्विचारं, सत्यसङ्कल्पं, माङ्गलिकसामग्रीं च प्रददाति।
प्रश्न 3. स्थूलपदान्याधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (प्रश्न निर्माण कीजिए)—
(क) वनवृक्षाः निर्विवेकं छिद्यन्ते।
प्रश्नम् — के निर्विवेकं छिद्यन्ते?
(ख) वृक्षकर्तनात् शुद्धवायुः न प्राप्यते।
प्रश्नम् — कस्मात् शुद्धवायुः न प्राप्यते?
(ग) प्रकृतिः प्राणिनां रक्षणाय यतते।
प्रश्नम् — प्रकृतिः केषाम् रक्षणाय यतते?
(घ) पर्यावरणरक्षणं धर्मस्य अङ्गम् अस्ति।
प्रश्नम् — पर्यावरणरक्षणं कस्य अङ्गम् अस्ति?
(ङ) अजातशिशुः मातृगर्भे सुरक्षितः तिष्ठति।
प्रश्नम् — अजातशिशुः कुत्र / कस्मिन् सुरक्षितः तिष्ठति?
प्रश्न 4. उदाहरणमनुसृत्य पदरचनां कुरुत (पदरचना कीजिए)—
| विग्रह-वाक्यम् |
समस्तपदम् (निष्पन्नं पदम्) |
| (क) जले चरन्ति इति |
जलचराः |
| (ख) स्थले चरन्ति इति |
स्थलचराः |
| (ग) खे (आकाशे) चरन्ति इति |
खेचराः |
| (घ) भूमौ चरन्ति इति |
भूचराः |
| (ङ) निशि चरन्ति इति |
निशाचराः |
| (च) वने चरन्ति इति |
वनचराः |
प्रश्न 5. नञ्-तत्पुरुषसमासस्य उदाहरणानि (नञ् समास पदरचना)—
| विग्रह-पदम् |
समस्तपदम् |
| (क) न सिद्धः |
असिद्धः |
| (ख) न सुखम् |
असुखम् |
| (ग) न भावः |
अभावः |
| (घ) न पूर्णः |
अपूर्णः |
| (ङ) न शान्तम् |
अशान्तम् |
प्रश्न 6. सन्धिं / सन्धि-विच्छेदं कुरुत (सन्धि एवं विच्छेद)—
| विच्छेद-पदम् |
सन्धि-पदम् (शुद्ध रूप) |
| (क) परि + आवरणम् |
पर्यावरणम् (यण् सन्धि) |
| (ख) अभि + उदयः |
अभ्युदयः (यण् सन्धि) |
| (ग) तथा + एव |
तथैव (वृद्धि सन्धि) |
| (घ) पो + अनः |
पवनः (अयादि सन्धि) |
| (ङ) अत्र + अपि |
अत्रापि (दीर्घ सन्धि) |
| (च) यथा + उक्तम् |
यथोक्तम् (गुण सन्धि) |
★ अतिरिक्त महत्त्वपूर्ण व्याकरण-बिन्दवः (प्रकृति-प्रत्यय एवं विलोमपदानि) ★
1. प्रकृति-प्रत्यय-विभागः —
• प्रकृतिः = प्र + कृ + क्तिन्
• विकृतिः = वि + कृ + क्तिन्
• संरक्षणम् = सम् + रक्ष् + ल्युट्
• परिष्कृतम् = परि + कृ + क्त
2. विलोम-पदानि —
• सुकरम् × दुष्करम् | • निर्मलम् × मलिनम् / दूषितम्
• सुखम् × दुःखम् | • रक्षितः × अरक्षितः / भक्षितः
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