# बुद्धिर्बलवती सदा — हिंदी अनुवाद
## कहानी का आरंभ (Image 2 - पहला भाग)
**देउलाख्य नामक गाँव में राजसिंह नाम का एक राजपुत्र रहता था।** एक बार किसी आवश्यक कार्य से उसकी पत्नी बुद्धिमती अपने दोनों पुत्रों को साथ लेकर अपने पिता के घर जा रही थी। रास्ते में घने जंगल में उसने एक बाघ देखा। बाघ को अपनी ओर आते देख उसने साहस से अपने दोनों पुत्रों को थप्पड़ मारा और जोर से बोली —
> **"क्यों तुम दोनों एक बाघ को खाने के लिए आपस में झगड़ रहे हो? एक को अभी खाओ, दूसरे को बाद में देखा जाएगा।"**
यह सुनकर बाघ यह समझा कि यह स्त्री कोई बाघ मारने वाली है, और वह भयभीत होकर वहाँ से भाग गया।
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**श्लोक का अर्थ:**
> अपनी बुद्धि से वह वीर स्त्री बाघ के भय से मुक्त हो गई।
> बुद्धि से बड़े-से-बड़े भय से भी मुक्ति मिल जाती है।
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## जंगल में शृगाल (गीदड़) का प्रसंग
भयभीत बाघ को देखकर एक चालाक **गीदड़** हँसकर बोला — **"भाई, तुम किस बात से डरकर भाग रहे हो?"**
**बाघ बोला —** जा जा, जम्बुक! मैं उस जगह से गुज़र रहा था जहाँ एक बाघ मारने वाली स्त्री की बात शास्त्रों में है, उसने मुझे मारने की कोशिश की, मैं बड़ी मुश्किल से बचा और तुरंत भाग आया।
**गीदड़ बोला —** वाह! यह तो बड़े आश्चर्य की बात है कि तुम एक मनुष्य से भी डर गए?
**बाघ बोला —** मैंने प्रत्यक्ष देखा कि उसने अपने पुत्रों को मुझे खाने के लिए थप्पड़ मार रही थी!
**गीदड़ बोला —** स्वामी! चलिए वापस वहाँ चलते हैं। यदि वह धोखेबाज़ वहाँ हो, तो मैं आपके लिए उसे मरवा दूँगा।
**बाघ बोला —** ठीक है, लेकिन अगर तुमने मुझे छोड़ दिया तो?
**गीदड़ बोला —** तो मुझे अपनी गर्दन में बाँधकर चलो।
बाघ ने ऐसा ही किया और गीदड़ को गले में बाँधकर जंगल में चल दिया।
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## बुद्धिमती की चतुराई (Image 1)
गीदड़ के साथ बाघ को दूर से आते देखकर बुद्धिमती **घबराई नहीं**, बल्कि चतुराई से बोली —
> **"अरे गीदड़! तूने मुझसे वादा किया था कि तू तीन बाघ लाएगा, और अब केवल एक ही लाया है — यह क्या धोखा है?"**
यह सुनते ही बाघ ने सोचा — **"गीदड़ ने मुझे धोखा दिया!"** और वह तुरंत डरकर भाग गया। गले में बँधा गीदड़ भी उसी के साथ खिंचता चला गया।
**श्लोक का अर्थ:**
> इस प्रकार बुद्धिमती पुनः बाघ के भय से मुक्त हो गई।
> इसीलिए कहा गया है —
> **"बुद्धि ही सदा बलवान होती है — सभी कार्यों में, सदा।"**
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## 📝 कहानी का सार
> **बुद्धि ही सच्चा बल है।** शारीरिक शक्ति से नहीं, चतुराई और साहस से बड़ी-से-बड़ी मुसीबत को टाला जा सकता है। बुद्धिमती ने बिना किसी हथियार के केवल अपनी बुद्धि से बाघ को दो बार भगाया।
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