हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय | रचनाएँ, भावपक्ष, कलापक्ष, साहित्य में स्थान
✍️ हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय ✍️
नाम: हरिशंकर परसाई
जन्म: 22 अगस्त 1924, होशंगाबाद (मध्य प्रदेश)
मृत्यु: 10 अगस्त 1995
विधा: व्यंग्य साहित्य
📚 रचनाएँ
- विकलांग श्रद्धा का दौर
- तब की बात और थी
- भोलाराम का जीव
- सदाचार का ताबीज
- निठल्ले की डायरी
- ठिठुरता हुआ गणतंत्र
- वैष्णव की फिसलन
💡 भावपक्ष
हरिशंकर परसाई जी के साहित्य में सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास, पाखंड और राजनीतिक भ्रष्टाचार पर तीखा व्यंग्य मिलता है।
उनकी रचनाओं में यथार्थवाद और समाज सुधार की भावना प्रमुख है।
वे हास्य के माध्यम से गहरी सामाजिक सच्चाइयों को उजागर करते हैं।
🎨 कलापक्ष
- सरल, सहज एवं बोलचाल की भाषा
- तीखा एवं प्रभावशाली व्यंग्य
- संवादात्मक शैली
- हास्य और व्यंग्य का संतुलित प्रयोग
- यथार्थवादी चित्रण
🏆 साहित्य में स्थान
हरिशंकर परसाई हिंदी के श्रेष्ठ व्यंग्यकार माने जाते हैं।
उन्होंने हिंदी व्यंग्य साहित्य को नई दिशा और ऊँचाई प्रदान की।
उनका स्थान हिंदी साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण और सम्माननीय है।
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