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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जीवन परिचय निम्न बिंदुओं के आधार पर लिखिए दो रचनाएं भाव पक्ष कला पक्ष साहित्य में स्थान ।
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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: जीवन परिचय
हिंदी साहित्य के 'तीसरे सप्तक' के यशस्वी कवि, कहानीकार और प्रखर पत्रकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उनका साहित्य आम आदमी की पीड़ा और सामाजिक विसंगतियों का दर्पण है।
1. प्रमुख रचनाएं
सक्सेना जी ने विविध विधाओं में लेखनी चलाई है। उनकी दो प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित हैं:
- खूँटियों पर टंगे लोग: यह उनका सबसे प्रसिद्ध कविता संग्रह है, जिसके लिए उन्हें 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
- बकरी: यह एक कालजयी राजनीतिक नाटक है, जो अपनी व्यंग्यात्मक शैली के लिए विश्वविख्यात है।
2. भावपक्ष और कलापक्ष
भावपक्ष (Thematic Aspects):
सक्सेना जी की कविताओं का मूल आधार यथार्थवाद है। उनके भावपक्ष की मुख्य विशेषताएं हैं:
- मध्यमवर्गीय चेतना: उन्होंने मध्यमवर्गीय समाज के संघर्ष, कुंठा और जिजीविषा को स्वर दिया है।
- विद्रोह का स्वर: उनकी रचनाओं में व्यवस्था के प्रति आक्रोश और आम आदमी के अधिकारों के लिए तड़प दिखाई देती है।
- प्रकृति प्रेम: उन्होंने प्रकृति का मानवीकरण करते हुए उसे ग्रामीण जीवन के करीब पेश किया है।
कलापक्ष (Artistic Aspects):
- सरल भाषा: उन्होंने क्लिष्ट शब्दों के बजाय सहज और बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है।
- प्रतीक और बिम्ब: सक्सेना जी ने 'बांस का पुल' और 'गर्म हवाएं' जैसे नए प्रतीकों के माध्यम से गूढ़ बातें कही हैं।
- व्यंग्यात्मक शैली: वे कम शब्दों में गहरा कटाक्ष करने की अद्भुत क्षमता रखते थे।
3. साहित्य में स्थान
हिंदी साहित्य जगत में सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का स्थान अद्वितीय और सर्वोपरि है। वे केवल एक साहित्यकार ही नहीं, बल्कि एक जागरूक सजग नागरिक भी थे। 'दिनमान' पत्रिका के माध्यम से उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा दी। बाल साहित्य से लेकर गंभीर नाटकों तक, उनकी लेखनी ने हर वर्ग को प्रभावित किया है। अपनी निर्भीक और जनवादी कविताओं के कारण वे सदैव पाठकों के हृदय में जीवित रहेंगे।
"साहित्य वही है जो समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज़ बने।"
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