विज्ञान भैरव तंत्र: 112 ध्यान विधियों का संपूर्ण मार्गदर्शक
विज्ञान भैरव तंत्र: आत्म-साक्षात्कार की 112 तकनीकें
विज्ञान भैरव तंत्र प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान का एक अनमोल रत्न है। यह ग्रंथ भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच एक संवाद है, जहाँ पार्वती मानवता के कल्याण के लिए सत्य की प्राप्ति का मार्ग पूछती हैं। इसके उत्तर में शिव किसी दार्शनिक सिद्धांत की व्याख्या करने के बजाय 112 ध्यान विधियों का वर्णन करते हैं।
"सत्य शब्दों में नहीं, अनुभव में है। यह ग्रंथ आपको वह अनुभव प्रदान करने की चाबियाँ देता है।" - रंजीत चौधरी
1. सांसों के माध्यम से परमात्मा का अनुभव
पहली कुछ विधियाँ सांस (प्राण) पर आधारित हैं। सांस हमारे शरीर और आत्मा के बीच का सेतु है।
धारणा 1 (श्लोक 24): अंदर आती सांस और बाहर जाती सांस जहाँ मिलती हैं, उस क्षणिक ठहराव पर ध्यान दें।
धारणा 2 (श्लोक 25): जब सांस पूरी बाहर निकल जाए (कुम्भक), तब उस शून्य में ठहरें।
धारणा 3 (श्लोक 26): अपनी चेतना को रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से (मूलाधार) से ऊपर उठते हुए महसूस करें।
2. शून्य और आकाश का ध्यान
शिव कहते हैं कि हमारा वास्तविक स्वरूप आकाश की तरह अनंत और शून्य है।
धारणा 20 (श्लोक 43): कल्पना करें कि आपका शरीर पूरी तरह खाली है और उसमें केवल आकाश भरा है।
धारणा 25 (श्लोक 48): अपनी त्वचा को एक पतली दीवार की तरह देखें जिसके भीतर कुछ भी ठोस नहीं है, केवल शून्यता है।
3. ध्वनियों का उपयोग (नाद योग)
ध्वनि से नि:शब्द की ओर जाने की यात्रा ही नाद योग है।
धारणा 16 (श्लोक 39): 'ॐ' का जाप करें और जब ध्वनि धीरे-धीरे शांत हो जाए, तो उस शांति में खो जाएं।
धारणा 18 (श्लोक 41): किसी संगीत वाद्ययंत्र की ध्वनि के अंतिम सिरे को तब तक सुनें जब तक वह शून्य न हो जाए।
4. कामुक ऊर्जा और आनंद (The 3 Sacred Techniques)
तंत्र शास्त्र में कामुकता को वर्जित नहीं माना गया, बल्कि इसे उच्च चेतना का साधन बनाया गया है।
धारणा 45 (श्लोक 68): संभोग के दौरान उत्पन्न होने वाले परम आनंद पर ध्यान केंद्रित करें। उस क्षण में 'मैं' को भूलकर केवल 'आनंद' बन जाएं।
धारणा 46 (श्लोक 69): साथी के साथ एकाकार होने की भावना में डूब जाएं। द्वैत को मिटाकर अद्वैत का अनुभव करें।
धारणा 47 (श्लोक 70): संभोग के बाद की उस शांत और विचारशून्य अवस्था में स्थिर रहें।
5. दैनिक जीवन में जागरूकता
ध्यान केवल आँखें बंद करके बैठने का नाम नहीं है।
धारणा 89 (श्लोक 112): जब आप बहुत ज्यादा खुश हों, या बहुत डरे हुए हों, उस झटके के समय अपनी चेतना को देखें।
धारणा 95 (श्लोक 118): छींकते समय या रोते समय जो मानसिक अंतराल (gap) आता है, उसे पकड़ें।
6. 112 विधियों का संपूर्ण सार
इन सभी विधियों का एक ही लक्ष्य है—मन का विसर्जन। जब मन (विचार) शांत होता है, तब 'भैरव' (परमात्मा) का प्राकट्य होता है। रंजीत चौधरी की पुस्तक यह स्पष्ट करती है कि इनमें से कोई भी एक विधि आपके जीवन को बदलने के लिए पर्याप्त है।
निष्कर्ष
विज्ञान भैरव तंत्र किसी धर्म की सीमा में नहीं बंधा है। यह विशुद्ध विज्ञान है—चेतना का विज्ञान। यदि आप सत्य की खोज में हैं, तो इन 112 विधियों में से वह विधि चुनें जो आपके दिल को छूती हो। याद रखें, अभ्यास ही एकमात्र कुंजी है।
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