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संकल्पों का नया सवेरा: २६ जनवरी २०२६
गणतंत्र दिवस पर एक विशेष भाषण
माननीय अतिथिगण, वरिष्ठजन, और मेरे प्यारे देशवासियों — सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! आज का यह दिन, २६ जनवरी २०२६, हमारे राष्ट्र के जीवन में एक और स्वर्णिम पृष्ठ जोड़ने आया है। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारे अतीत के गौरव, वर्तमान की जिम्मेदारी और भविष्य के सपनों के बीच एक पुल है।
१. विरासत की ओर देखते हुए
आज से ठीक छह दशक पहले, १९५० में, हमने अपने संविधान को अपनाया था। वह दस्तावेज केवल कानूनों का संग्रह नहीं है; वह हमारी सामूहिक चेतना, आकांक्षाओं और नैतिक बुनियाद का प्रतिबिंब है। उसने हमें केवल एक शासन प्रणाली नहीं दी, बल्कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर एक समाज की नींव रखी। आज हमारा कर्तव्य है कि हम उन मूल्यों की रक्षा करें और उन्हें और अधिक सशक्त बनाएं।
"संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जीवन की एक मार्गदर्शिका है। यह हमारी आशाओं का आधार है।"
२. वर्तमान: चुनौतियाँ और अवसर
आज २०२६ में खड़े होकर देखें, तो हमारे सामने एक जटिल दुनिया है। जलवायु परिवर्तन की चुनौती हो या डिजिटल युग में नैतिकता का सवाल, हमें नए समाधान चाहिए। हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी युवा शक्ति है। शिक्षा और नवाचार के जरिए हमें उन्हें सशक्त बनाना है। साथ ही, हमें अपनी आर्थिक प्रगति को सभी तक पहुँचाना है, ताकि विकास संतुलित और समावेशी रहे।
३. भविष्य का निर्माण: हमारा सामूहिक कर्तव्य
आने वाला कल हमारे हाथों में है। हमें एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो आर्थिक रूप से समृद्ध हो, सामाजिक रूप से न्यायसंगत हो, और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील हो। इसके लिए जरूरी है:
- शिक्षा में क्रांति: एक ऐसी शिक्षा जो रटंत नहीं, सोचने और निर्माण करने की क्षमता दे।
- नवाचार को बढ़ावा: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में स्वदेशी नवाचार पर जोर।
- सामाजिक सद्भाव: विविधता में एकता को मजबूत करना — यही हमारी सबसे बड़ी पहचान है।
४. नागरिक के रूप में हमारी भूमिका
गणतंत्र केवल संस्थाओं का नहीं, नागरिकों का भी है। एक जिम्मेदार नागरिक बनने का मतलब है — अधिकारों के प्रति सजग रहना और कर्तव्यों के प्रति ईमानदार रहना। छोटे-छोटे कदम, जैसे सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान, पर्यावरण बचाना, और समाज के कमजोर वर्गों की मदद करना, एक बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकते हैं। आइए, हम अपने दैनिक जीवन में संविधान के मूल्यों को जीने का प्रयास करें।
"सच्चा गणतंत्र तब साकार होता है जब हर नागरिक अपने कर्तव्य को अधिकार से बड़ा समझे।"
मित्रों, यह दिन नए संकल्प लेने का दिन है। आइए, हम संकल्प लें कि हम अपने देश को और अधिक सहनशील, समृद्ध और शक्तिशाली बनाएंगे। हम अपनी विरासत पर गर्व करेंगे, वर्तमान की चुनौतियों को ऊर्जा से स्वीकार करेंगे, और भविष्य के लिए मिलकर काम करेंगे।
हमारा गणतंत्र अमर रहे! हमारा भारत विश्व गुरु बने!
— जय हिन्द, जय भारत! —
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