सॉन्गरूपक अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित। व्यतिरेक अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित। विरोधाभास अलंकार की परिभाषा उदाहरणसहित। कवित्त छंद की परिभाषा उदाहरण सहित

IDEAL CONVENT HIGHER SECONDARY SCHOOL, BIAORA

कक्षा - 12वीं | विषय - हिन्दी

महत्वपूर्ण अलंकार एवं छंद सत्र: 2025-26
Q. 1 सांगरूपक अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए?

परिभाषा: जहाँ उपमेय पर उपमान का सर्वांग (सभी अंगों सहित) आरोप किया जाता है, वहाँ सांगरूपक अलंकार होता है। इसमें मुख्य रूपक के साथ-साथ उसके अंगों पर भी रूपक का आरोप होता है।

उदाहरण:
"उदित उदयगिरि मंच पर, रघुवर बाल पतंग।
विकसे संत सरोज सब, हरषे लोचन भृंग॥"
Q. 2 विरोधाभास अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए।

परिभाषा: जहाँ वास्तव में विरोध न होते हुए भी केवल शब्दों के माध्यम से विरोध का आभास हो, वहाँ विरोधाभास अलंकार होता है।

उदाहरण:
"या अनुरागी चित्त की, गति समुझे नहिं कोइ।
ज्यों-ज्यों बूड़े स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जलु होइ॥"
Q. 3 व्यतिरेक अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए।

परिभाषा: जहाँ उपमान की अपेक्षा उपमेय को किसी विशेष गुण के कारण श्रेष्ठ बताया जाए, वहाँ व्यतिरेक अलंकार होता है।

उदाहरण:
"संत हृदय नवनीत समाना। कहा कबिन्ह परि कहै न जाना।
निज परिताप द्रवइ नवनीता। पर दुख द्रवहिं संत सुपुनीता॥"
Q. 4 सोरठा (Sortha) छंद की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए।

परिभाषा: यह एक अर्धसम मात्रिक छंद है। यह 'दोहा' छंद का ठीक उल्टा होता है। इसके प्रथम और तृतीय चरण में 11-11 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं।

उदाहरण:
"जो सुमिरत सिधि होय, गन नायक करिबर बदन।
करहु अनुग्रह सोय, बुद्धि रासि सुभ गुन सदन॥"
Q. 5 सवैया छंद की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए।

परिभाषा: यह एक वर्णिक छंद है। इसमें 22 से लेकर 26 वर्ण होते हैं। इसके कई भेद हैं जैसे- मत्तगयंद, सुमुखी आदि।

उदाहरण:
"मानुस हों तो वही रसखानि, बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।
जो पसु हों तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मंझारन॥"
Q. 6 कवित्त छंद की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए।

परिभाषा: यह एक वर्णिक छंद है। इसे 'मनहरण' भी कहते हैं। इसमें कुल 31 वर्ण होते हैं। 16 और 15 वर्णों पर यति (विराम) होती है और अंतिम वर्ण गुरु होता है।

उदाहरण:
"पात बिनु कीन्हें हैं विसाल कहुं कैसे करि,
तैसेई बिहाल बन माल बिनु कीन्हें हैं।"
(अथवा अन्य प्रसिद्ध रामचरितमानस/रीतिकाल के उदाहरण)
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